अल्प मानदेय से आक्रोशित आशा सहयोगिनियों का फूटा गुस्सा, सीएमएचओ कार्यालय पर प्रदर्शन; बोली- स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा जिम्मा हमारे कंधों पर, पर महीने के 5 हजार भी नहीं मिलते
अलवर (राजस्थान) धरातल पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा सहयोगिनियों का सब्र अब जवाब दे गया है। अल्प मानदेय और काम के भारी बोझ से परेशान जिले भर की आशा सहयोगिनियां अपनी मुख्य मांग 'राज्य कर्मचारी का दर्जा' देने को लेकर लामबंद हो गईं और सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और "आशा शोषण बंद करो" व "हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते" के नारे लगाकर अपनी आवाज बुलंद की।
- दिन-रात काम, पर घर चलाना मुश्किल
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कंचनलता ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा जिम्मा आशा सहयोगिनियों के कंधों पर है। जच्चा-बच्चा की पूरी देखभाल से लेकर 15 साल तक के बच्चों के टीकाकरण का काम भी वही संभालती हैं। इसके अलावा क्षेत्र में मलेरिया, डेंगू या कोई अन्य संक्रामक बीमारी का केस आने पर सबसे पहले आशा सहयोगिनी ही मौके पर पहुंचती हैं।
कंचनलता ने दर्द बयां करते हुए कहा, "हमसे दिन-रात काम लिया जाता है, लेकिन मानदेय के नाम पर हमें 5 हजार रुपए भी पूरे नहीं मिलते हैं। आज के इस महंगाई के दौर में इतने कम पैसों में घर चलाना पूरी तरह असंभव हो चुका है। हमारी स्पष्ट मांग है कि सरकार हमें राज्य कर्मचारी घोषित करे।"
- समय पर दें उपस्थिति, मांग सरकार तक भेजेंगे: स्वास्थ्य विभाग
दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। विभाग के अधिकारी ने बताया कि आशा सहयोगिनियों ने मानदेय बढ़ाने और उसके भुगतान में देरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। भुगतान के संबंध में विभाग ने सहयोगिनियों को हिदायत दी है कि वे हर महीने की 1 तारीख को अपनी उपस्थिति (Attendance) अनिवार्य रूप से जमा करा दें, ताकि बजट और मानदेय जारी करने में अनावश्यक देरी न हो।
स्वास्थ्य विभाग अलवर के अधिकारी का कहना है कि - "मानदेय बढ़ाने या राज्य कर्मचारी का दर्जा देने का फैसला पूरी तरह राज्य सरकार के स्तर का है। विभाग के स्तर पर उनकी इन मांगों को संकलित कर उच्च अधिकारियों और सरकार तक भिजवा दिया जाएगा।"
अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद आशा सहयोगिनियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही उनके हितों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने पर मजबूर होंगी।


