सदगुरु कबीर आश्रम में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, संतों ने दिया जीवन में सद्गुण अपनाने का संदेश
सोयला (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा। बावड़ी उपखंड क्षेत्र के सोयला स्थित सदगुरु कबीर आश्रम में आयोजित चातुर्मास महोत्सव में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। प्रतिदिन आयोजित हो रहे सत्संग, भजन और प्रवचनों से समूचा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंगा हुआ है। इस दौरान आश्रम के संतों द्वारा श्रद्धालुओं को जीवन में अहंकार का त्याग कर सद्गुण धारण करने की प्रेरणा दी जा रही है।
आश्रम के कार्यकर्ता त्यागराज उपाध्याय ने बताया कि सत्संग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आश्रम के महंत माधव दास महाराज ने कहा कि जीवन में अच्छी बातें और विचार जहां से भी प्राप्त हों, उन्हें सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। यदि किसी शत्रु में भी अच्छे गुण दिखाई दें, तो उनका सम्मान और प्रशंसा करने का साहस मनुष्य में होना चाहिए।
अहंकार जीवन उन्नति में सबसे बड़ा बाधक
महंत माधव दास ने कहा, "स्वयं की प्रशंसा सुनना जितना आसान है, उसे पचा पाना उतना ही कठिन होता है। अत्यधिक प्रशंसा और सम्मान मनुष्य के भीतर सूक्ष्म अहंकार को जन्म देता है, जो उसके आध्यात्मिक व व्यावहारिक उत्थान के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।" इसके विपरीत, जब व्यक्ति दूसरों के अच्छे गुणों की सराहना करता है, तो उसके स्वयं के अहंकार का नाश होता है और वह सहज ही दूसरों के प्रेम व आदर का पात्र बन जाता है।
भगवान वामन और राजा बलि का दिया उदाहरण
उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए समझाया कि भगवान वामन ने भी राजा बलि के दानवीर और श्रेष्ठ गुणों की प्रशंसा करके ही सहजता से तीनों लोकों को प्राप्त कर लिया था। दूसरों के श्रेष्ठ गुणों की सराहना करना और उन्हें अपने आचरण में ढालने का निरंतर प्रयास करना ही जीवन में वास्तविक उन्नति का मार्ग है।
भजन-कीर्तन से गुंजायमान हुआ आश्रम
सत्संग के दौरान आश्रम के संत झीपरदास महाराज, संत भिवदास महाराज, साध्वी संतोष बाई एवं बाल संत गोपाल महाराज सहित अन्य संतों ने सुमधुर भजनों और आध्यात्मिक प्रवचनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
दर्जनों गांवों से पहुँच रहे श्रद्धालु
चातुर्मास महोत्सव में सोयला सहित नारवा, पालड़ी, ढढोरा, चटालिया, धनारी, लूणावास, नागड़ी, मोरनावड़ा, खुडाला, आसंडा एवं आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु कथा श्रवण और दर्शन हेतु पहुँच रहे हैं।

