गोविंदगढ़-रामबास नगरपालिका क्षेत्र सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, जगह जगह लगे कचरे के ढेर; जनता बेहाल
चार दिनों से सफाई कार्य पूरी तरह ठप; ठेका प्रथा बंद करने और ₹783 दैनिक मजदूरी की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
गोविंदगढ़-रामबास (अलवर) स्थानीय नगरपालिका क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की पिछले चार दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण कस्बे की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कस्बे के मुख्य बाजारों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में कचरे के भारी ढेर लग गए हैं। तीखी धूप और गंदगी के कारण उठने वाली सड़ांध और बदबू से स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और व्यापारियों का जीना मुहाल हो गया है। कस्बे में महामारी फैलने का अंदेशा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
- शोषण का आरोप, SDM को सौंपा विस्तृत ज्ञापन
वाल्मीकि सेना राजस्थान प्रदेश और समस्त सफाई कर्मचारियों के संयुक्त तत्वावधान में उपखंड अधिकारी (एसडीएम) गोविंदगढ़ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नगरपालिका में चल रहे सफाई के ठेके के तहत उनका भारी शोषण किया जा रहा है। संगठन ने प्रशासन को पहले ही चेतावनी देते हुए शनिवार से कार्य बहिष्कार (हड़ताल) का ऐलान कर दिया था।
ये हैं सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
- ठेका प्रथा की समाप्ति: नगर पालिका में चल रही ठेका प्रथा को पूरी तरह से बंद किया जाए और सभी सफाई कर्मियों को सीधे संविदा (Contract) पर नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही वर्तमान में किस फर्म के पास सफाई का ठेका है, इसे भी स्पष्ट करने की मांग की गई है।
- वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी: कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है। केंद्र सरकार के नए आदेशानुसार अकुशल श्रमिक की दैनिक मजदूरी ₹783/- लागू की जाए और हर माह का वेतन 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से नियमित रूप से दिया जाए।
- साप्ताहिक अवकाश व मूल कार्य: कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) नहीं दिया जा रहा है, जिसे तुरंत शुरू किया जाए। इसके अलावा नगरपालिका में कार्यरत गैर-वाल्मीकि सफाई कर्मचारियों को उनके मूल कार्य (सफाई कार्य) के स्थान पर अन्य जगहों पर लगाया जाता है, जिसे बंद कर उन्हें मूल कार्य पर तैनात किया जाए।
- भविष्य निधि और स्वास्थ्य सुरक्षा: पीएफ (PF) मामलों का जल्द निपटारा हो, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए और सभी कर्मचारियों के ईएसआई (ESI) कार्ड अनिवार्य रूप से बनवाए जाएं।
- संसाधनों की उपलब्धता: हर कर्मचारी को महीने में झाड़ू उपलब्ध कराई जाए तथा सफाई के लिए जरूरी उपकरण और ड्रेस दी जाए।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
- कस्बे की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्थानीय व्यापार मंडल और आम जनता ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच वार्ता कर गतिरोध नहीं सुलझाया गया, तो कस्बे की स्थिति और अधिक नारकीय हो जाएगी। फिलहाल कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है।


