वैध-अवैध की जंग में फंसा कारोबार: क्रेशर एसोसिएशन ने लगाए अवैध वसूली के आरोप, अनिश्चितकालीन धरना जारी
घाटरी में 'रोजगार बचाओ, क्रेशर बचाओ' आंदोलन तेज: क्रेशर मालिकों का बड़ा फैसला, अब वाहनों में नहीं भरेगा ओवरलोड माल
हलैना / भुसावर ( विष्णु मित्तल)
क्रेशर मालिक यूनियन एवं मजदूर एकता मंच के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे ‘रोजगार बचाओ, क्रेशर बचाओ’ अभियान के तहत घाटरी जोन के कारवान गांव स्थित धार्मिक स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना एवं प्रदर्शन लगातार जारी है। क्रेशर मालिकों, मजदूरों, स्थानीय व्यापारियों और वाहन चालकों के इस साझा आंदोलन का असर अब भवन निर्माण कार्य, रोजगार और स्थानीय बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है।
अंडरलोडिंग माल बेचने का लिया निर्णय धरना दे रहे क्रेशर मालिकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अब किसी भी वाहन में ओवरलोड माल नहीं भरा जाएगा। सभी वाहनों में विभागीय नियमानुसार एवं वैध टीपी (ट्रांसपोर्ट परमिट) के साथ केवल अंडरलोड डस्ट, गिट्टी और पत्थर ही भरा व बेचा जाएगा। इस फैसले के चलते भुसावर, वैर, भरतपुर सहित उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा और अलीगढ़ तक के बाजारों में निर्माण सामग्री की आवक और दामों पर सीधा असर पड़ना शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में गिट्टी और डस्ट के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
नियमों की पालना और अवैध वसूली के आरोप क्रेशर मालिकों का कहना है कि घाटरी जोन के सभी क्रेशर खनन, पुलिस, वन, पर्यावरण, प्रशासन एवं परिवहन विभाग के नियमों के तहत पूरी तरह वैध रूप से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कुछ असामाजिक तत्व और साधु-संत अवैध वसूली के उद्देश्य से प्रशासन, क्रेशर संचालकों और वहां काम करने वाले गरीब मजदूरों को परेशान करने के लिए धरना दे रहे हैं। क्रेशर एसोसिएशन ने चुनौती देते हुए कहा कि विरोध करने वाले बताएं कि क्षेत्र में कौन सा क्रेशर अवैध रूप से चल रहा है।
घाटरी में साधु-संतों का विरोध प्रदर्शन जारी दूसरी ओर, गांव घाटरी में गत 30 जुलाई से एक व्यक्ति भूख हड़ताल पर बैठा है, जिसके समर्थन में 25-30 स्थानीय लोग और साधु-संत अवैध क्रेशरों को बंद कराने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। वहीं, क्रेशर मालिकों का कहना है कि साधु-संत वर्ष में कई बार आकर अवैध वसूली का दबाव बनाते हैं और मना करने पर फर्जी विरोध प्रदर्शन शुरू कर देते हैं। इस खींचतान के कारण फिलहाल क्षेत्र का पूरा क्रेशर उद्योग और उससे जुड़े हजारों मजदूरों का रोजगार संकट में पड़ गया है।

