गौशाला के लिए खुदाई के दौरान निकली प्राचीन देवी प्रतिमा, क्षेत्र में खुशी का माहौल
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) भीलवाड़ा जिले के बांसडा गुंदली गांव की देवभूमि क्षेत्र में एक निजी भूमि पर गौचर बचाओ फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित गौशाला एवं गौ चिकित्सालय के निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में एक प्राचीन देवी प्रतिमा मिलने से क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।
जानकारी के अनुसार गौचर बचाओ फाउंडेशन ने इस भूमि को गौशाला एवं गौ चिकित्सालय के संचालन के लिए 30 वर्ष की लीज पर लिया है। शनिवार को गौशाला के शेड के लिए अर्थ ऑगर मशीन से गड्ढे खोदे जा रहे थे। एक स्थान पर खुदाई के दौरान मशीन बार-बार बड़े पत्थरों से टकरा रही थी। जब आसपास की मिट्टी हटाई गई तो पहले बड़े पत्थर और एक नंदी की प्रतिमा मिली। इसके बाद लगभग 6 से 7 फीट गहराई पर एक सुरक्षित संगमरमर की सुंदर देवी प्रतिमा प्राप्त हुई।
प्रतिमा को सावधानीपूर्वक गौचर बचाओ फाउंडेशन के कार्यालय लाया गया, जहां साफ-सफाई के बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्रतिमा लगभग 2 फीट ऊंची संगमरमर की बनी हुई है। प्रतिमा का स्वरूप अत्यंत आकर्षक एवं मनमोहक है। प्रथम दृष्टि में यह महालक्ष्मी या राधारानी की प्रतिमा जैसी प्रतीत होती है! प्रतिमा मिलने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ के फोन आ रहे हैं तथा दूर-दूर से भी श्रद्धालु जानकारी ले रहे हे।
गौचर बचाओ फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष एडवोकेट मुकेश कुमार सुथार ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इतनी बड़ी प्रतिमा की घर में स्थापना नहीं की जाती। इसलिए सभी कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों से विचार-विमर्श के बाद गौशाला एवं गौ चिकित्सालय के साथ प्रतिमा के प्राकट्य स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कर विधिवत स्थापना की जाएगी।
क्षेत्र के कुछ बुजुर्गों के अनुसार वर्षों पहले यह प्रतिमा एक निर्धन भील परिवार को एक संत के आशीर्वाद से प्राप्त हुई थी। बाद में परिस्थितिवश इसे जमीन में सुरक्षित दबा दिया गया था। यह लोककथा क्षेत्र में प्रचलित है, किंतु इसका कोई ऐतिहासिक या दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
प्रतिमा मिलने से बांसडा एवं आसपास के गांवों में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है तथा ग्रामीण इस स्थान पर सर्वधर्म समभाव की भावना से एक भव्य मंदिर के निर्माण की अपेक्षा कर रहे हैं।


