श्वेतांबर जैन परंपरा का आठ दिवसीय महापर्व पर्युषण आज से शुरू
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) श्वेतांबर जैन समाज का पवित्र पर्युषण महापर्व 8 सितंबर मंगलवार से 15 सितंबर मंगलवार तक आठ दिनों तक मनाया जाएगा, यह पर्व समवसरी के साथ समाप्त होगा।
श्वेतांबर जैन परंपरा में पर्युषण पर्व आठ दिनों तक चलता है, जबकि दिगंबर परंपरा में इसी समय से जुड़ा दशलक्षण पर्व 10 दिनों तक होगा।
पर्युषण पर्व जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, जो हर साल भाद्रपद माह में मनाया जाता है। यह पर्व दिगंबर और श्वेतांबर दोनों समुदायों द्वारा अलग-अलग समय पर मनाया जाता है। जिसका समापन उत्तम क्षमा के साथ होता है।
पर्व का महत्व
यह 8 दिनों का आत्म-शुद्धि का पर्व है, जिसमें जैन समुदाय के लोग आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-चिंतन पर विशेष ध्यान देते हैं। पर्युषण दो शब्दों से मिलकर बना है ,परि(चारों ओर) और उषण(निवास करना)जिसका अर्थ है आत्मा में निवास करना या अपने भीतर झांकना। इस दौरान लोग धार्मिक ग्रंथों का पाठ करगे। उपवास करेंगे। और भगवान महावीर के सिद्धांतों का पालन करते हैं।
पर्युषण के मुख्य पहलू
पर्युषण पर्व के दौरान पांच मुख्य सिद्धांतों का पालन किया जाता है।
अहिंसा, इस दौरान जीव-जंतुओं के प्रति दया और प्रेम का भाव रखा जाता है।
सत्य, मन वचन और कर्म से सच्चाई का पालन किया जाता है।
अस्तेय, किसी भी वस्तु को बिना अनुमति के ग्रहण नहीं किया जाता।
ब्रह्मचर्य, शारीरिक और मानसिक शुद्धता पर जोर दिया जाता है।
अपरिग्रह, सांसारिक वस्तुओं के प्रति अनासक्ति का भाव रखा जाता है।
पर्युषण का अंतिम दिन क्षमा का दिन होता है, जिसे श्वेतांबर में संवत्सरी और दिगंबर में उत्तम क्षमा कहते हैं। समापन पर लोग 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहकर एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगते हैं। यह पर्व सभी जीवों के प्रति करुणा, क्षमा और मैत्री का भाव जगाता है। और व्यक्ति को एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है।
पर्युषण पर्व पर क्या न करें....
हरी सब्ज़ियाँ जमीकंद खाने का त्याग
जैन धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार, पर्युषण के दौरान लोग हरी सब्ज़ियाँ जमीकंद खाने से परहेज़ करते हैं। हालाँकि, हरी सब्ज़ियों की जगह वे दूध से बने भोजन का सेवन कर सकते हैं।
बाहर का खाना खाने का त्याग
चूंकि पर्युषण के दौरान खाया जाने वाला भोजन पूरी तरह से सात्विक होता है, इसलिए बाहर का खाना या रेस्तरां और होटलों से जंक फूड खाना वर्जित है।
चमड़े की वस्तुओं का उपयोग या पहनना
पर्युषण के उत्सव के दौरान लोग खुद को सभी भौतिक दुनिया और भौतिकवादी चीजों से अलग कर लेते हैं और एक सरल जीवन जीने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार, चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग या पहनना उन्हें भौतिक दुनिया और उसकी भौतिक संपत्तियों से जोड़ देता है, जो वैराग्य के मूल सिद्धांत का खंडन करता है।
गुस्सा करना या अपशब्दों का प्रयोग न करना
पर्युषण पर्व मनाने का पूरा सिद्धांत व्यक्ति के पिछले बुरे कर्मों को साफ करना है। इसलिए, दूसरों के लिए अपशब्दों का प्रयोग करना या गुस्सा करना और कठोर बातें कहना व्यक्ति के बुरे कर्मों को खत्म करने के बजाय उन्हें और बढ़ा देगा।

