बछ बारस पर उमड़ी आस्था: महिलाओं ने गाय-बछड़े की पूजा कर मांगी पुत्रों की दीर्घायु, रखा निर्जला व्रत
बछ बारस पर्व: बावड़ी क्षेत्र में आस्था और परंपरा का संगम; महिलाओं ने गाय-बछड़े की पूजा कर मांगी संतान की दीर्घायु
बावड़ी (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा
बावड़ी कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में मंगलवार को बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का पर्व अत्यंत श्रद्धा, धार्मिक उल्लास और परंपरा के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं में पर्व को लेकर भारी उत्साह देखा गया। महिलाओं ने अपने पुत्रों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना के साथ दिनभर व्रत रखा।
विधिवत पूजा-अर्चना और परिक्रमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं ने गाय और बछड़े की पूजा कर उन्हें रोली-अक्षत का तिलक लगाया और पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित की। इसके बाद महिलाओं ने गाय और बछड़े की परिक्रमा कर परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
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पारंपरिक व्रत: सुहागिनों ने अपने पुत्रों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखा विशेष व्रत।
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सामूहिक कथा वाचन: महिलाओं ने एक स्थान पर एकत्र होकर बछ बारस की पौराणिक कथा सुनी।
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संस्कृति का जतन: पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए महिलाओं ने अपना व्रत खोला।
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धार्मिक माहौल: दिनभर कस्बे व ग्रामीण इलाकों में भक्तिमय और उत्सव का माहौल बना रहा।
ग्रामीण क्षेत्र में इस दौरान लोक-संस्कृति और सनातन परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर अपने-अपने परिवारों की समृद्धि की कामना की।

