बाल विकास परियोजना कुम्हेर में आनन-फानन में जारी आदेशों से बना असमंजस, कार्मिकों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की
कुम्हेर/डीग (विष्णु मित्तल) वर्ष 1994 से सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल के तहत गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित बाल विकास परियोजना कुम्हेर इन दिनों प्रशासनिक असमंजस का विषय बनी हुई है। परियोजना की संचालन अवधि में समय-समय पर विभाग द्वारा अभिवृद्धि की जाती रही है तथा इस बार भी संचालन अवधि बढ़ाने संबंधी पत्रावली राज्य सरकार के पास विचाराधीन बताई जा रही है।
इसी बीच निदेशालय द्वारा जारी आदेश के माध्यम से बाल विकास परियोजना अधिकारी, नगर को केवल आहरण एवं वितरण कार्य हेतु अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। किंतु आरोप है कि उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, डीग द्वारा उक्त आदेश की व्यापक व्याख्या करते हुए अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भी डीग परियोजना के स्टाफ को कुम्हेर परियोजना का अतिरिक्त कार्यभार प्रदान करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे परियोजना में वर्षों से कार्यरत कार्मिकों तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
जानकारी के अनुसार महिला पर्यवेक्षकों को बिना हस्ताक्षर वाली सूचियां उपलब्ध कराकर सेक्टरों में कार्य करने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं स्पष्ट और विधिवत आदेश के अभाव में नई व्यवस्था को लेकर संशय में हैं। विशेष रूप से मेवात क्षेत्र में ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं के कारण कई कार्यकर्ता बिना अधिकृत आदेश के विभागीय सूचनाएं साझा करने में संकोच कर रही हैं।
गौरतलब है कि कुम्हेर परियोजना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की नियुक्तियां संबंधित संस्था द्वारा की गई हैं। ऐसी स्थिति में यदि विभाग इन कार्मिकों को यथावत बनाए रखता है, तो परियोजना में कार्यरत संस्था के कार्यालयीन कार्मिकों—जैसे परियोजना अधिकारी, लेखाकार, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक, महिला पर्यवेक्षक, तथा अन्य सहायक कर्मचारियों—की स्थिति को लेकर भी कानूनी एवं प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
कार्मिकों का कहना है कि लगभग 32 वर्षों से गैर सरकारी संगठन के माध्यम से संचालित इस परियोजना के स्थान पर फिलहाल विभाग के समक्ष कोई स्पष्ट एवं व्यवहारिक वैकल्पिक व्यवस्था दिखाई नहीं देती। ऐसे में संचालन अवधि की अभिवृद्धि पर राज्य सरकार का निर्णय आने तक संस्था के माध्यम से वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखना परियोजना संचालन और कार्मिकों के हित में होगा।
परियोजना से जुड़े कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि राज्य सरकार स्तर पर लंबित संचालन अवधि अभिवृद्धि प्रकरण का शीघ्र निस्तारण किया जाए तथा परियोजना में उत्पन्न प्रशासनिक असमंजस को दूर करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे आंगनवाड़ी सेवाओं का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे और वर्षों से कार्यरत कार्मिकों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

