भरतपुर: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता विकास प्रशिक्षण आयोजित,1,025 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला विशेष प्रशिक्षण
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)19 सितंबर। जिले में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और बाल-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा निरंतर क्षमता विकास गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी श्रृंखला में रॉकेट लर्निंग संस्था एवं समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) के संयुक्त तत्वावधान में रूपबास ब्लॉक के रुदावल सेक्टर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रथम चरण का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
उल्लेखनीय है कि जिले में 23 जुलाई से शुरू हुए इस विशेष कार्यक्रम के तहत अब तक वैर, भुसावर, भरतपुर शहर, बयाना, उच्चैन, सेवर एवं रूपबास ब्लॉक के विभिन्न सेक्टरों में कुल 1,025 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
खेल आधारित तकनीकों और बाल मनोविज्ञान पर जोर आईसीडीएस के उप निदेशक सिकमाराम चोयल ने जानकारी दी कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक व सामाजिक विकास को गति देने के लिए कार्यकर्ताओं को गतिविधि और खेल आधारित शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए एक रोचक, आनंददायक और बाल-अनुकूल सीखने का माहौल तैयार करना है। जिला समन्वयक प्राची चौधरी एवं सुपरवाइजर उमा देवी के निर्देशन में आयोजित इस शिविर में 30 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जिन्हें बाल मनोविज्ञान, भाषा व संज्ञानात्मक विकास और विद्यालय पूर्व शिक्षा की प्रभावी तकनीकों से अवगत कराया गया।
गतिविधियों से समझाया शुरुआती वर्षों का महत्व प्रशिक्षण के दौरान कागज के गिलासों से टावर बनाने की समूह गतिविधि के माध्यम से समझाया गया कि जिस तरह किसी इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, ठीक उसी प्रकार शुरुआती वर्ष ही बच्चे के सर्वांगीण विकास की आधारशिला होते हैं।
इसके अतिरिक्त प्रशिक्षकों (रजनी बंसल, रेखा, रूबी, रुबीना, बजयंती व सुनीता) ने वास्तविक खाद्य सामग्री और चित्रों के प्रयोग से अनुभव-आधारित अधिगम (Experience-based Learning) की अवधारणा समझाई। कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया गया कि वे बच्चों को केवल किताबी ज्ञान न दें, बल्कि उन्हें देखने, छूने, महसूस करने, बोलने और प्रश्न पूछने के अवसर दें, जिससे उनके भीतर जिज्ञासा, रचनात्मकता और भाषा कौशल का प्राकृतिक विकास हो सके।

