साहित्य को किताबों से निकालकर समाज तक पहुंचाना होगा : अनिल सक्सेना ‘ललकार’
डीग (नीरज जैन)। '21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन' की श्रृंखला के तहत रविवार को कामां गेट स्थित विमल वाटिका मैरिज गार्डन में ‘डीग साहित्यिक संवाद–2026’ का भव्य आयोजन किया गया। ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत : साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा का नवजागरण’ विषयक इस संवाद में साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक एवं वरिष्ठ साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने कहा कि साहित्य को केवल पुस्तकों और सभागारों तक सीमित न रखकर गांवों व युवाओं तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा, “सूचना व्यक्ति को जानकार बनाती है, जबकि साहित्य उसे विचारवान और संवेदनशील बनाता है।” उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ-साथ पुस्तकों को भी अपनी जीवनशैली में शामिल करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गजेंद्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि तकनीक के दौर में सूचनाओं की भरमार के बीच अच्छी पुस्तकें युवाओं को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अध्ययन से निर्णय क्षमता और विवेक का विकास होता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर, भरतपुर की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली, सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’, सेवानिवृत्त RPS नत्थी सिंह, श्याम सिंह जघीना, चंद्रपाल सिंह वहज और गिरिजाशंकर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार व्यक्त किए।
- पुस्तक लोकार्पण एवं काव्यपाठ
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा 18 वर्षीय युवा लेखक अंकित मीणा की पुस्तक 'अल्फाज ए रंगरेज' का लोकार्पण किया गया। इसके पश्चात आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि मनोज मनु पाराशर, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, जगत पाराशर, पंकज ‘प्रखर’, गोविंद ‘ब्रजवासी’ और सुनील ‘सरल’ सहित कई रचनाकारों ने अपनी सांस्कृतिक व समसामयिक कविताओं से समां बांध दिया।
कार्यक्रम समन्वयक मोरध्वज सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से जारी इस अभियान के तहत प्रदेश में 1000 से अधिक आयोजन हो चुके हैं और अब इसे पंचायत स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं यूथ मूवमेंट के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

