शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर से किया जाता है रोगों का खात्मा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर कस्बे में एक विशेष आयुर्वेदिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। बैद्यनाथ के सौजन्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं के द्वारा शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की चांदनी में रखी गई खीर में आयुर्वेदिक दवा मिलाकर सोमवार प्रात: 4:00 बजे से 7:00 बजे तक मरीजों को पिलाई गई। खंडेलवाल धर्मशाला के पास आयोजित इस शिविर में दमा और श्वास रोगियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर लाभ उठाया।
चंद्रमा की किरणों और ओस से भरपूर होती है औषधि
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणें और रात भर खीर पर पड़ने वाली ओस औषधीय गुणों (अमृत) से भरपूर होती है, जो दमा (अस्थमा), पुरानी खांसी और सांस संबंधी रोगों में बेहद फायदेमंद साबित होती है। इसी परंपरा के तहत शिविर में तड़के से ही कस्बे सहित दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी मरीजों का आना शुरू हो गया था। सोमवार सुबह 100 से अधिक मरीजों ने इस आयुर्वेदिक खीर का सेवन किया।
पिछले 20 वर्षों से दी जा रही है यह अचूक दवा
आरएसएस के भुवनेश खूटेटा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की खीर दमा, खांसी और पुरानी एलर्जी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस खीर में मिली दवा का सेवन करने के लिए लोग सालभर इंतजार करते हैं। गत कई वर्षों से आयोजित हो रहे इस शिविर में मरीजों को निःशुल्क दवा दी जाती है, जिसका सेवन करने के तुरंत बाद से राहत मिलना शुरू हो जाती है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. गजराज सिंह ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात खीर को खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखा जाता है और अगले दिन सुबह उसमें जड़ी-बूटियों से निर्मित औषधि मिलाकर मरीजों को दी जाती है। पिछले 20 वर्षों से लगातार यह सेवा दी जा रही है, जिससे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ में काफी मदद मिल रही है।
मरीजों को मिल रहा चमत्कारी लाभ
खीर खाने के बाद राहत महसूस करने वाले कई पुराने मरीजों ने बताया कि वे पिछले कई सालों से इस शिविर में आकर नियमित रूप से इस दवा का सेवन कर रहे हैं। इससे उनकी पुरानी सांस, दमा और एलर्जी की बीमारी में काफी हद तक निजात मिली है और सालभर स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

