भरतपुर में 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान का व्यापक असर: विद्यालयों में आयोजित विधिक शिविरों में बच्चों को बताए गए कानूनी अधिकार और सुरक्षा के उपाय
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में चलाए जा रहे 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के तहत मंगलवार को जिले के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविरों का भव्य आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश मसरूर आलम खान तथा प्राधिकरण के सचिव नीरज भामू के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, लीगल डिफेंस काउंसिल और पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।
बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
प्राधिकरण के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविरों के दौरान विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के लिए मुखर होने, अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने और किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में उचित कदम उठाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को पूर्ण सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
गुड टच-बैड टच और पोक्सो अधिनियम की दी जानकारी
शिविरों में बालक-बालिकाओं को गुड टच और बैड टच के अंतर, उनके मौलिक अधिकारों तथा सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान विशेष रूप से—
-
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act)
-
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015
-
भारतीय न्याय संहिता, 2023
के महत्वपूर्ण प्रावधानों से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को अवगत कराया गया।
बाल विवाह, एंटी रैगिंग और डिजिटल सुरक्षा पर भी मंथन
विशेष सत्रों के दौरान बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम, त्वरित न्याय, एंटी रैगिंग कानूनों तथा बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि बाल विवाह उनके उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसके साथ ही, आपात स्थिति के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और निःशुल्क विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी भी साझा की गई।
आज के इस डिजिटल युग की मांग को देखते हुए शिविरों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल सुरक्षा (Digital Security) और डेटा गोपनीयता के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी गई, ताकि वे ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर खतरों से बच सकें।

