नाग पूजन के लिए उमड़ा प्रेम,सूर्योदय के साथ ही महिला श्रद्धालुओं का लगा जमावड़ा
कठूमर, (अलवर/ अशोक भारद्वाज) सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार श्रावण वास में कृष्ण पक्ष को पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाई गई । मंगलवार को प्रातः काल से ही नाग देवता की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। जिसको लेकर कठूमर कस्बा स्थित हॉद वाली बगीची पर सांप की बंबी पर पूजा करने के लिए महिला श्रद्धालुओं का मंगलवार को प्रातः काल से ही जनसैलाब उमड़ पड़ा नाग पंचमी से एक दिन पूर्व महिलाएं चना, मौठ अन्य सामग्री पानी में भिगोकर रखती है और नाग पंचमी के दिन विधि विधान के साथ श्रद्धा भाव के साथ पूजा अर्चना कर अपने पति व परिवार सहित क्षेत्र की कुशलता की कामना करती हैं। महिला श्रद्धालु चीना गुप्ता व डिंपल खंडेलवाल ने बताया कि आज नाग पंचमी पर नाग देवता का पूजन किया गया अपने घरों से मोठ, मूंग अन्य सामग्री लाती है और करील के पेड़ के नीचे सांप की बंबी का पूजन करती है अपने सुहाग व परिवार सहित क्षेत्र की सुख शांति की कामना की जाती है।
लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने का वर्णन मिलता है।
वही वास्तविकता में नाग की पूजा के पीछे ये भी एक संदेश छुपा है कि बुरे और कड़वा बोलने वाले लोग भी हमारे सच्चे हितैषी होते हैं. नाग प्राकृतिक सफाई कर्मी भी है. वे विभिन्न प्रकार के कीड़े मकोड़ों को खा जाते हैं. जिससे किसानों की फसलों और लोगों की रक्षा होती है, और पर्यावरण में संतुलन बना रहता है।

