सोडावास कस्बे सहित आसपास के गांवो में जलझूलनी एकादशी पर नगर भ्रमण को निकले ठाकुर जी के हिंडोले
मुंडावर (देवराज मीणा) सोडावास कस्बे सहित आसपास के गांवो में जलझूलनी एकादशी का पर्व बुधवार को आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सोडावास ठाकुर जी मंदिर, भानोत गांव के ठाकुर जी मंदिर, हटुंडी गांव के सीताराम मंदिर, चिरूनी गांव के ठाकुर जी मंदिर एवं छापुर, पदमाड़ा, करनिकोट, सरूप सराय, राजवाड़ा, पिपली, जीवन सिंह पुरा सहीत आसपास के गांवो में बुधवार को मंदिरों में विशेष रूप से सजाए गए एवं ठाकुर जी के हिंडोले निकाले गए। गाँव गाँव मे मंदिरो के पुजारीयों ने सिंगार कर भक्तों के दर्शनार्थ प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा में शामिल होकर ठाकुर जी की परिक्रमा की और मंगल कामना की अरदास की। हिंडोलो की शोभायात्रा के दौरान गांवो में जगह-जगह सहयोग मिलकर किया। गांव में युवा मंडलों एवं सामाजिक संस्थाओं शोभायात्रा में शामिल होकर व्यवस्था संभाली। इससे धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एक जुटता और सहयोग की मिसाल भी देखने को मिली।
भानोत गांव के ठाकुर जी का मेला भरा। ग्रामीणों ने मेले परिसर में बढ़ चढ़कर भाग लिया। मंदिर के पुजारी राजेश कौशिक, गुड्डू व प्रदीप कौशिक ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी या परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु शयनवस्था से करवट बदलते हैं। ठाकुर जी को जल में झूलाने और हिंडोले निकालने की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है। व्रत और पूजन से सुख समृद्धि परिवार की मंगल कामना और कष्टो से मुक्ति प्राप्त होती है। उधर सोडावास ठाकुर जी मंदिर के पुजारी सोमदत तिवाड़ी ने बताया इस बार एकादशी बुधवार को पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया। मान्यता है कि बुधवार को भगवान विष्णु की कृपा के साथ ही गणेश जी की आराधना का पुण्य भी प्राप्त होता है। यह योग परिवार की उन्नति और संतान की प्रगति का कारक माना गया है।

