चौरीचौरा में सफाई नायक की नियुक्ति को बताया नियम विरुद्ध, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
चौरीचौरा (गोरखपुर)। नगर पंचायत चौरीचौरा (पूर्व नाम मुंडेरा बाजार) में मृतक आश्रित के आधार पर हुई एक सफाई नायक की नियुक्ति अब विवादों के घेरे में है। मुंडेरा बाजार निवासी शिव शंकर जायसवाल ने मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और शासन के उच्चाधिकारियों को पत्रक भेजकर इस नियुक्ति को पूरी तरह अवैध और फर्जी करार दिया है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दशकों पुरानी नियुक्ति पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगभग पांच दशक पहले घनश्याम मिश्रा नामक व्यक्ति की सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्ति अवैधानिक तरीके से हुई थी। घनश्याम मिश्रा की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने के बाद, उनके पुत्र अंजय मिश्रा उर्फ झुनझुन बाबा को साल 2006 में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त किया गया। आरोप है कि यह नियुक्ति चुनाव आचार संहिता के दौरान आनन-फानन में और नियमों को ताक पर रखकर की गई थी।
रिकॉर्ड गायब करने और जालसाजी का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन नियुक्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलें और रिकॉर्ड नगर पंचायत कार्यालय से मिलीभगत कर गायब कर दिए गए हैं। इस मामले में पूर्व में भी कार्रवाई हो चुकी है। तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (EO) अम्बिका सिंह ने अंजय मिश्रा और नगर पंचायत के तत्कालीन लिपिक राम अवतार के खिलाफ थाना चौरीचौरा में मुकदमा पंजीकृत कराया था।
दबंगई और अवैध संपत्ति की शिकायत
शिव शंकर जायसवाल ने अपने पत्रक में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि: अंजय मिश्रा सरकारी पद का दुरुपयोग कर क्षेत्र में दबंगई और गुंडागर्दी करता है।
वह बड़े पैमाने पर गैर-लाइसेंसी सूदखोरी (ब्याजखोरी) का धंधा चलाता है, जिससे उसने अकूत चल-अचल संपत्ति अर्जित की है।
उसके आतंक के कारण स्थानीय लोग आवाज उठाने से डरते हैं।
महिला अधिकारी से अभद्रता का मामला भी दर्ज
पत्रक के अनुसार, आरोपी का विवादों से पुराना नाता रहा है। पूर्व में तैनात रहीं अधिशासी अधिकारी पूजा सिंह परिहार के साथ भी आरोपी ने छेड़खानी और मारपीट की थी। जान से मारने की धमकी मिलने पर महिला अधिकारी ने भागकर अपनी जान बचाई थी, जिसका मुकदमा भी चौरीचौरा थाने में दर्ज है।
शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि इस पूरे 'फर्जीवाड़े' की गहनता से जांच की जाए ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग और अवैध नियुक्तियों पर अंकुश लग सके।