बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल पर संकट, पैदावार घटने का बढ़ा खतरा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन
उपखंड क्षेत्र में आज सुबह हुई हल्की बारिश से खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया है। खेतों में पानी भरने और फसल के जमीन पर बिछ जाने से उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है, जिससे किसान आर्थिक संकट और गहरी चिंता में हैं।
मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आज सुबह हुई हल्की बारिश और हवाओं के कारण क्षेत्र के कई हिस्सों में गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है। तैयार खड़ी सुनहरी फसल के इस तरह गिरने से किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। अचानक आए इस मौसम परिवर्तन ने खेतों में तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। कृषि एक्सपर्ट का मानना है कि इस समय फसल गिरने से दाना काला पड़ सकता है और चमक खो सकता है।
गेहूं की फसल इस समय अपनी परिपक्वता के अंतिम दौर में है। ऐसे में हवाओं के साथ हुई बारिश से भारी नुकसान पहुंचता है। जब फसल गिर जाती है, तो उसे पर्याप्त धूप और हवा नहीं मिल पाती, जिससे दाने का विकास रुक जाता है और वह सिकुड़ जाता है। साथ ही, जमीन की नमी के संपर्क में आने से बालियों में फफूंद लगने या सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में किसानों की लागत खाद, बीज और सिंचाई तो निकलना दूर, अब फसल की कटाई में भी भारी मजदूरी खर्च होगी क्योंकि मशीनें गिरी हुई फसल को ठीक से नहीं काट पातीं।
पीड़ित किसान मांगीलाल बेरवा का कहना है कि कुदरत की मार ने सब कुछ छीन लिया है। कल तक जो फसल लहरा रही थी, आज वह खेत में बिछी पड़ी है। बारिश के साथ चली हवाओं ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जब गेहूं गिर जाता है, तो उसकी पैदावार आधी रह जाती है।