गरीब बेटियों का विवाह कर मिशाल कायम की
राजगढ़ (अलवर) अनिल गुप्ता
राजगढ़ क्षेत्र से इंसानियत, संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
जमवारामगढ़ में तैनात थानाधिकारी भगवान सहाय मीना ने दो गरीब बेटियों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी भर दी। जिन बेटियों के सिर से मां का साया उठ चुका था और पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार चला रहे थे, उन बेटियों का विवाह भगवान सहाय मीना ने अपने घर से करवा कर समाज को मानवता का बड़ा संदेश दिया है। राजगढ़ क्षेत्र के ग्राम पलवा में भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। यहां पुलिस की वर्दी में सेवा देने वाले भगवान सहाय मीना ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
दो निर्धन बेटियां… जिनकी मां इस दुनिया में नहीं रही… पिता मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे थे… ऐसे में बेटियों की शादी परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई थी। लेकिन तभी भगवान सहाय मीना और उनकी पत्नी मुस्कान मीना इन बेटियों के लिए मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने अपने ही निवास स्थान को बेटियों का मायका बनाया और पूरे रीति-रिवाजों के साथ दोनों बेटियों का विवाह संपन्न करवाया। शादी में गांव और आसपास के लोगों ने भी परिवार बनकर जिम्मेदारी निभाई। हर आंख नम थी, लेकिन बेटियों की विदाई के साथ चेहरे पर सुकून और खुशी भी साफ दिखाई दे रही थी। भगवान सहाय मीना हमेशा से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। वहीं उनकी पत्नी मुस्कान मीना भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए निरंतर कार्य करती रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग अपनों से दूरी बना लेते हैं, वहां भगवान सहाय मीना ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। भगवान सहाय मीना ने कहा कि “जरूरतमंद बेटियों की मदद करना हमारा कर्तव्य है। अगर हमारे छोटे से प्रयास से किसी परिवार के चेहरे पर मुस्कान आती है, तो इससे बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं।” एक पुलिस अधिकारी की यह संवेदनशील पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह सिर्फ दो बेटियों की शादी नहीं, बल्कि मानवता, अपनापन और सामाजिक जिम्मेदारी का ऐसा संदेश है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।


