NEET रद्द होने पर छात्रों की दो टूक: "दुख है कि मेहनत दोबारा करनी होगी, पर संतोष है कि अब 'कचरा' बाहर होगा"
अलवर। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले पर अलवर के परीक्षार्थियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। छात्रों में जहां एक ओर परीक्षा रद्द होने से समय और पैसे की बर्बादी का दुख है, वहीं दूसरी ओर इस बात का संतोष भी है कि अब केवल योग्य और मेहनती छात्र ही मेडिकल कॉलेजों तक पहुँच सकेंगे।
????️ "कटऑफ की मार से बचेंगे ईमानदार छात्र"
छात्रा कनिष्का सैनी, जो पिछले दो वर्षों से तैयारी कर रही थीं, ने कहा कि पेपर लीक होने से कटऑफ बहुत ऊंची चली जाती, जिससे वास्तविक तैयारी करने वालों को नुकसान होता। हालांकि दोबारा तैयारी करना परेशानी भरा है, लेकिन निष्पक्षता के लिए यह जरूरी था। वहीं, छात्र अथर्व खंडेलवाल का मानना है कि पेपर रद्द होने से वे लोग रुक जाएंगे जो पैसे के दम पर अच्छे कॉलेज हासिल करने की फिराक में थे।
✍️ "मेहनत करने वालों को मिलेगा हक"
छात्र विनय ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि पहले खबर सुनकर दुख हुआ क्योंकि समय और पैसा दोनों खराब हुए, लेकिन लीक पेपर के साथ रिजल्ट आने पर मेहनत करने वालों के हाथ से कॉलेज निकल जाता। उन्होंने कहा— "अब 'कचरा' साइड हो जाएगा और सिर्फ पढ़ने वाले ही कॉलेज पहुँच सकेंगे।"
✅ एनटीए के फैसले का समर्थन
छात्रा शिवानी और लक्षिता ने एनटीए के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ईमानदारी से परीक्षा देने वालों को सही परिणाम मिलना जरूरी है। लक्षिता ने बताया कि उन्हें अच्छे कॉलेज की उम्मीद थी, जो पेपर लीक की स्थिति में धूमिल हो सकती थी। अब 'री-नीट' (Re-NEET) होने से चीटिंग करने वालों को फायदा नहीं मिल सकेगा।
???? छात्रों की मुख्य चिंताएं:
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समय और आर्थिक नुकसान: दोबारा परीक्षा केंद्र तक पहुँचने और कोचिंग/तैयारी में अतिरिक्त समय व धन का व्यय।
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मानसिक तनाव: अच्छे जा चुके पेपर को दोबारा देने का दबाव।
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पारदर्शिता की मांग: छात्रों ने सरकार से मांग की है कि दोबारा होने वाली परीक्षा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों ताकि फिर से ऐसी नौबत न आए।


