स्कूली बच्चों के नवाचार देख विशेषज्ञ हैरान: सुनामी का अलर्ट देने वाला सिस्टम और महिलाओं के लिए 'स्मार्ट ज्वेलरी' तैयार
जयपुर। राजधानी के स्कूली छात्रों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता से ऐसे प्रोजेक्ट्स तैयार किए हैं, जो भविष्य में समाज की बड़ी समस्याओं का समाधान बन सकते हैं। मौका था जेईसीआरसी (JECRC) यूनिवर्सिटी में मंगलवार को आयोजित ‘पेटेंट पिच मिशन 2026’ का, जहाँ छात्रों के इनोवेटिव आइडियाज को देखकर केंद्र सरकार के पेटेंट विभाग के अधिकारी भी प्रभावित नजर आए।
????️ सुरक्षा के लिए 'स्मार्ट वियरेबल' ज्वेलरी
कार्यक्रम में सबसे अधिक चर्चा “सेंट्रा प्रोडक्ट इकोसिस्टम” की रही। महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा के लिए छात्रों ने ऐसे पेंडेंट और ब्रेसलेट तैयार किए हैं जो देखने में सामान्य ज्वेलरी जैसे हैं, लेकिन संकट के समय सुरक्षा उपकरण बन जाते हैं:
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एनेस्थीसिया बेस्ड पेंडेंट: यह खतरे के समय हमलावर को अस्थायी रूप से असंतुलित करने में सक्षम है।
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इलेक्ट्रिक पल्स ब्रेसलेट: आत्मरक्षा के लिए हल्का इलेक्ट्रिक पल्स जनरेट कर हमलावर को रोक सकता है।
???? सुनामी का पहले ही मिल जाएगा अलर्ट
शाश्वत, अन्वय और सौम्या की टीम ने “स्मार्ट सुनामी डिटेक्शन सिस्टम” प्रस्तुत किया। यह सेंसर आधारित तकनीक समुद्र में पानी के दबाव और असामान्य गतिविधियों को पहचानकर समय से पहले अलर्ट जारी कर सकती है। साथ ही, यह सिस्टम लोगों को सुरक्षित रास्तों और रेस्क्यू पॉइंट्स की जानकारी देने में भी सक्षम है।
???? स्वास्थ्य क्षेत्र में 'मिनीलिसिस' का कमाल
किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाने के उद्देश्य से छात्रों ने “मिनीलिसिस” प्रोजेक्ट का प्रोटोटाइप पेश किया। इसका लक्ष्य डायलिसिस मशीन को पोर्टेबल और कम लागत वाला बनाना है, ताकि सामान्य व्यक्ति भी इलाज का खर्च वहन कर सके।
60 आइडियाज होंगे पेटेंट
जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने बताया कि छात्रों द्वारा प्रस्तुत 80 आइडियाज में से 60 को पेटेंट के लिए उपयुक्त पाया गया है। यूनिवर्सिटी इन छात्रों की पेटेंट फाइलिंग में पूरी मदद करेगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, केंद्र सरकार के पेटेंट एंड डिजाइन विभाग के असिस्टेंट कंट्रोलर डॉ. जितेंद्र शर्मा ने छात्रों को कॉपीराइट और रिसर्च की बारीकियों से अवगत कराया।
भविष्य की योजना: यूनिवर्सिटी अब स्कूल स्तर पर भी IPR (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) सेल विकसित करने की योजना बना रही है, ताकि छात्रों को शुरुआती उम्र से ही रिसर्च और बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विशेषज्ञों ने कहा- इस तरह के आयोजन बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें समाज की समस्याओं को समझकर समाधान खोजने की दिशा में प्रेरित करते हैं।


