अलवर: RGHS में इलाज बंद होने पर भड़के कर्मचारी, मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन कर फूंका चिकित्सा मंत्री का पुतला
अलवर (अमित शर्मा)। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने और सरकार द्वारा इसे 'इंश्योरेंस मोड' पर ले जाने की कवायद के खिलाफ आज जिला मुख्यालय पर भारी आक्रोश देखने को मिला। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने मिनी सचिवालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री का पुतला फूंक कर अपना विरोध दर्ज कराया।
वरदान बनी योजना अब बनी कर्मचारियों के लिए मुसीबत
महासंघ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार मीणा ने संबोधित करते हुए कहा कि जो योजना कर्मचारियों के लिए 'वरदान' साबित हो रही थी, उसे सरकार की प्रशासनिक विफलता ने ठप कर दिया है।
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25 मार्च से: निजी संस्थानों ने दवाइयां देना बंद किया।
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14 अप्रैल से: चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं।
इस स्थिति के कारण हजारों गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारी और पेंशनभोगी इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्हें अपनी जमा पूंजी निजी अस्पतालों में खर्च करनी पड़ रही है।
'इंश्योरेंस मोड' का कड़ा विरोध
महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकार इस योजना को निजी बीमा कंपनियों के हाथों में सौंपने (इंश्योरेंस मोड) की तैयारी कर रही है, जिसे कर्मचारी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि जब केंद्र की CGHS और पूर्व सैनिकों की ECHS योजनाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं, तो राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग RGHS के प्रबंधन में विफल क्यों है?
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
महासंघ ने साफ किया है कि प्रदेश के 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने RGHS को उसके मूल स्वरूप में तुरंत बहाल नहीं किया, तो आगामी दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान महासंघ के घटक संगठनों के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें: केसरी सिंह गुर्जर, मुकेश ईटोली, मुकेश चौधरी, धर्म सिंह यादव, मनोज यादव, प्रवीण शर्मा, धारा सिंह चौधरी, दिनेश यादव, नरेंद्र शर्मा, पुष्पेंद्र मीणा और हंसराज सहित सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।


