भरतपुर को रोजगार, जल सुरक्षा, शिक्षा और पर्यटन का मॉडल जिला बनाया जाए : सीताराम गुप्ता

Jul 1, 2026 - 15:19
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भरतपुर को रोजगार, जल सुरक्षा, शिक्षा और पर्यटन का मॉडल जिला बनाया जाए : सीताराम गुप्ता

भरतपुर, (विष्णु मित्तल) समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने कहा कि भरतपुर का भविष्य केवल आधारभूत सुविधाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि रोजगार, जल सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कृषि, उद्योग और पर्यटन के समन्वित विकास से सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि भरतपुर को पूर्वी राजस्थान का आर्थिक विकास केंद्र बनाने के लिए एक दीर्घकालिक और समग्र विकास नीति अपनाने की आवश्यकता है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि भरतपुर आज भी बेरोजगारी, जल संकट और औद्योगिक पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। जिले के हजारों युवा रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष अन्य शहरों की ओर पलायन करने को विवश हैं। यदि स्थानीय स्तर पर आधुनिक कौशल संस्थान, उच्च शिक्षण संस्थान और उद्योग स्थापित किए जाएँ तो न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि भरतपुर निवेश और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा भरतपुर में सड़क, रेल, स्वास्थ्य एवं अन्य आधारभूत विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं, जो अत्यंत स्वागतयोग्य हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि विकास के अगले चरण में रोजगार, सिंचाई, शिक्षा, कृषि आधारित उद्योग और पर्यटन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे।

  • रोजगार आधारित विकास ही आत्मनिर्भर भरतपुर का मार्ग

1.    भारतीय कौशल संस्थान (Indian Institute of Skilling)
गुप्ता ने कहा कि भरतपुर को शिक्षा, कौशल और उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करनी होगी। इसके लिए पूर्व में स्वीकृत भारतीय कौशल संस्थान (Indian Institute of Skills) को शीघ्र प्रारंभ किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को आधुनिक उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके।
2.    आईआईएम की स्थापना
उन्होंने भरतपुर में आईआईएम की स्थापना की भी मांग करते हुए कहा कि इससे प्रबंधन शिक्षा, स्टार्टअप, उद्यमिता और औद्योगिक निवेश को नई गति मिलेगी तथा भरतपुर पूरे पूर्वी राजस्थान के लिए ज्ञान और नवाचार का केंद्र बन सकेगा। भरतपुर पहला संभाग है जहाँ कोई भी उच्चस्तरीय संसथान नहीं है।
3.    एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना
उन्होंने कहा कि वैर में प्रस्तावित राज्य स्तरीय एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर शीघ्र स्थापित किया जाए, ताकि किसानों को प्रसंस्करण, भंडारण, पैकेजिंग और विपणन की आधुनिक सुविधाएँ मिलें तथा कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार हो।
4.    कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना
उन्होंने कहा कि भरतपुर संभाग में आज तक कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कुम्हेर कृषि महाविद्यालय के निकट कृषि विश्वविद्यालय स्थापित होने से किसानों को आधुनिक अनुसंधान, नई तकनीक और वैज्ञानिक खेती का सीधा लाभ मिलेगा।
5.    हनी एक्सीलेंस सेंटर
हनी एक्सीलेंस सेंटर के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि इसे महिला कारागार सेवर एवं राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र के मध्य उपलब्ध राजकीय भूमि पर स्थापित किया जाए। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का लाभ सीधे मधुमक्खी पालकों को मिलेगा तथा शहद उत्पादन और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

6.    भरतपुर -- गारमेंट्स हब 
भरतपुर में गारमेंट्स एवं टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब की स्थापना से बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं, विशेषकर महिलाओं, के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बेहतर औद्योगिक अवसंरचना, कौशल प्रशिक्षण और निवेश को प्रोत्साहन देकर भरतपुर को राजस्थान के प्रमुख रेडीमेड परिधान उत्पादन एवं निर्यात केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

  • जल सुरक्षा बने विकास की आधारशिला

1.    गुडगाँव कैनाल का विस्तारीकरण
गुप्ता ने कहा कि हाल ही में हुए यमुना जल समझौते से राजस्थान के लिए नई संभावनाएँ बनी हैं। उन्होंने मांग की कि इस समझौते के अंतर्गत भरतपुर और डीग जिले के लिए पर्याप्त जल आवंटन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गुडगाँव कैनाल से मिलने वाला पानी सीमित एवं प्रदूषित है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। खोह (डीग) से रूपवास तक गुड़गांव कैनाल का निर्माण होने से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
2.    गंभीर नदी पानी में भरतपुर की भागीदारी
उन्होंने कहा कि वर्ष 1979 में करौली जिले में गंभीर नदी पर पांचना बांध का निर्माण हुआ, लेकिन आज तक भरतपुर को उसका लाभ नहीं मिला। इसलिए पांचना बांध में भरतपुर का वैधानिक जल हिस्सा निर्धारित किया जाना चाहिए। साथ ही बाणगंगा नदी के पुनर्जीवन के लिए गंभीर नदी से इसे जोड़ने तथा पीकेसी-ईआरसीपी परियोजना के अंतर्गत भरतपुर एवं डीग के सभी प्रमुख बांधों को एक-दूसरे से जोड़ने की योजना शीघ्र लागू की जानी चाहिए।
3.    ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP)
उन्होंने कहा कि ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) सहित सभी प्रमुख जल परियोजनाओं का लाभ भरतपुर तक पहुंचाया जाए। साथ ही पांचना बांध में भरतपुर का वैधानिक जल हिस्सा निर्धारित किया जाए तथा बाणगंगा नदी के पुनर्जीवन एवं प्रमुख जल स्रोतों को आपस में जोड़कर दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
4.    गंगा नदी के जल की हिस्सेदारी
वार्ता में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक ने बताया की अब समय आ गया है कि राज्य सरकार को गंगा नदी के जल की हिस्सेदारी भी प्राप्त करने का प्रयास शुरु करना चाहिए ! तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय बाबू राजबहादुर ने पहल की लेकिन बाद में किसी ने भी इसकी पैरबी नही की !
5.    भरतपुर – 2050 जल संसाधन योजना
भरतपुर 2050 जल संसाधन योजना के अंतर्गत जिले की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमुना जल की पर्याप्त उपलब्धता, पांचना बांध में भरतपुर का न्यायसंगत हिस्सा, सुजान गंगा नहर का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण तथा आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2050 तक भरतपुर को जल-सुरक्षित, कृषि समृद्ध और सतत विकास वाला जिला बनाना है।
उन्होंने बताया कि समृद्ध भारत अभियान वर्ष 2050 को ध्यान में रखते हुए भरतपुर की जल आवश्यकताओं, जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर जल संसाधन योजना तैयार कर रहा है।
पर्यटन बने रोजगार का नया इंजन
1.    भरतपुर -- पर्यटन जिला
गुप्ता ने कहा कि विश्वप्रसिद्ध पक्षी विहार, लोहागढ़ किला, डीग महल, धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के कारण भरतपुर में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। यदि इन सभी स्थलों का समग्र विकास किया जाए और महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग की तर्ज पर भरतपुर को पर्यटन जिला घोषित किया जाए, तो हजारों नए रोजगार सृजित होंगे, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
2.    सुजान गंगा नहर
सुजान गंगा नहर भरतपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यदि इस नहर का वैज्ञानिक पुनरोद्धार, सौंदर्यीकरण, नियमित जल प्रवाह, जल शोधन तथा दोनों किनारों पर विकसित वॉक-वे, साइकिल ट्रैक, हरित पट्टी, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटन सुविधाएँ विकसित की जाएँ, तो यह भरतपुर को एक विश्वस्तरीय हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म शहर के रूप में स्थापित कर सकती है। इससे शहर की जल निकासी व्यवस्था में भी सुधार होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय व्यापार एवं पर्यटन को नई गति मिलेगी तथा हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। 
उन्होंने बताया कि भरतपुर शहर में बनाये जा रहे फ्लाईओवरों में से काली की बगीची से आरबीएम् तक के फ्लाईओवर को निरस्त किया जाये और इसके निर्माण से बचत 130 करोड़ रूपये की राशि को सुजान गंगा के जीर्णोद्धार पर व्यय किया जाए ! 
3.    सडको के निर्माण से पर्यटन बढावा

  •  भरतपुर–बयाना–हिण्डौन–करौली–सवाई माधोपुर तक फोरलेन निर्माण किया जाए
  • NH-21 पर स्थित खेड़ली मोड़ से नगर, नगर से गुलपाड़ा तथा गुलपाड़ा से सीकरी होते हुए पहाड़ी तक फोरलेन निर्माण किया जाए
  • भरतपुर-अलवर फोरलेन को भरतपुर-बहरोड़ वाया अलवर तक कर दिया जाये
  • डीग–कामां–पहाड़ी फोरलेन मार्ग का निर्माण किया जाए
  • कामां से जुरहरा तथा जुरहरा से होडल मार्ग विकसित किया जाए
  • भरतपुर–मथुरा–अलीगढ़–बरेली हाईवे के रूप में विकसित किया जाए

अंत में सीताराम गुप्ता ने कहा कि भरतपुर का विकास केवल स्थानीय आवश्यकता नहीं, बल्कि पूर्वी राजस्थान के संतुलित विकास की अनिवार्यता है। जल, रोजगार, शिक्षा, कृषि, उद्योग एवं पर्यटन को एकीकृत दृष्टिकोण से विकसित कर ही भरतपुर को राजस्थान का आदर्श विकास मॉडल बनाया जा सकता है।

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