पंचायत व प्रशासन की अनदेखी से अस्तित्व खो रहा खुडियाना का ऐतिहासिक तालाब, ग्रामीणों ने की जीर्णोद्धार की मांग
पंचायत और प्रशासन की उदासीनता से मिट रहा खुडियाना का ऐतिहासिक तालाब; जीर्णोद्धार की मांग को लेकर मंत्रियों के द्वार पहुंचे ग्रामीण
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
निकटवर्ती ग्राम खुड़ियाना में पंचायत एवं प्रशासनिक उपेक्षा के चलते गांव का सदियों पुराना ऐतिहासिक तालाब बदहाली के कगार पर पहुंच गया है। कभी गांव के प्रमुख जलस्रोत और सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह ऐतिहासिक स्थल उचित देखरेख के अभाव में अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
जलस्रोत के साथ आय का भी जरिया था तालाब
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 8 से 10 बीघा क्षेत्र में फैले इस विशाल तालाब का उपयोग वर्षों तक ग्रामीण दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ धार्मिक एवं मांगलिक आयोजनों में करते आए हैं। पूर्व में ग्राम पंचायत को यहां मत्स्य पालन से भी राजस्व प्राप्त होता था। तालाब परिसर में पक्की सीढ़ियां, पानी की निर्बाध आवक के लिए सुरंगनुमा पक्की मोरी तथा चार भव्य ऐतिहासिक छतरियां निर्मित हैं, जो गांव की ऐतिहासिक समृद्धि का प्रतीक हैं।
मिट्टी से पटा तालाब, जर्जर हुईं ऐतिहासिक छतरियां
लंबे समय से रखरखाव न होने के कारण तालाब का बड़ा हिस्सा मिट्टी और मलबे से भर चुका है। पानी की आवक के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं और सुरक्षा दीवारें जगह-जगह से ढह रही हैं। परिसर में स्थित छतरियां भी जर्जर होकर बदहाल स्थिति में हैं। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते संरक्षण कदम नहीं उठाए गए, तो यह अमूल्य धरोहर पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
जीर्णोद्धार के लिए केंद्रीय व राज्य मंत्रियों से लगाई गुहार
तालाब के पुनरुद्धार और संरक्षण की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार जाटव ने समस्त ग्रामवासियों की ओर से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव तथा राजस्थान सरकार के वन मंत्री संजय शर्मा को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने तालाब की सफाई, मिट्टी निकासी, जल आवक मार्गों को पुनः शुरू करने, सुरक्षा दीवारों की मरम्मत और छतरियों के सौंदर्यीकरण कार्य को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है।

