बच्चे के सर्वांगीण विकास की पहली गुरु माँ: तखतगढ़ में मातृ सम्मेलन आयोजित, संस्कृति, खान-पान और मोबाइल के सही उपयोग पर मंथन
डिजिटल दौर में संस्कारों की ढाल: तखतगढ़ के रायगांधी आदर्श विद्या मंदिर में सजा मातृ शक्ति का मंच
तखतगढ़ (बरकत खा): कस्बे के गोगरा रोड स्थित रायगांधी आदर्श विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय में मातृ शक्ति के अभिनंदन और बाल विकास में उनकी भूमिका पर मंथन के लिए 'मातृ सम्मेलन' का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता वीनू सोलंकी, प्रबंध समिति की सदस्या मंजुला गांधी और सीता सुथार द्वारा माँ शारदे, ॐ एवं माँ भारती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सुमधुर गीत प्रस्तुत कर माताओं का वंदन किया।
डिजिटल युग और संस्कारों पर खरा प्रहार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता वीनू सोलंकी ने वर्तमान समय में बच्चों पर मंडराते डिजिटल खतरों पर तीखा और सटीक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल का बढ़ता दुरुपयोग बच्चों की एकाग्रता और संस्कारों को निगल रहा है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए माताओं को सजग होना होगा। उन्होंने भोजन (आहार), भवन (वातावरण) और भूषा (पहनावे) के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को अपनाकर ही आने वाली पीढ़ी को सही दिशा दी जा सकती है।
रोमांचक खेल और प्रश्नोत्तरी से जुड़ा मातृ शक्ति का उत्साह केवल भाषण ही नहीं, बल्कि सम्मेलन को जीवंत बनाने के लिए माताओं के लिए भारतीय संस्कृति, सामान्य ज्ञान और आसपास की जानकारियों पर आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। साथ ही विभिन्न मनोरंजक खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हुआ, जिसमें मातृ शक्ति ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विजेताओं को विद्यालय परिवार की ओर से पुरस्कृत कर उनका हौसला बढ़ाया गया।
आभार और संचालन कार्यक्रम का कुशल संचालन आचार्या सीमा जीनगर ने किया। अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य हरिराम जोगसन ने सम्मेलन में पधारी सभी माताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माँ ही बच्चे की पहली पाठशाला होती है। इस अवसर पर विद्या मंदिर के सभी आचार्य बंधु एवं भगिनियाँ उपस्थित रहे।

