15 दिन से सफाई कर्मियों की हड़ताल से लक्ष्मणगढ़ में कचरे का अंबार, सभा भवन तक नहीं; कैसे सुलझेंगी कस्बे की समस्याएं?
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन । नगर पालिका लक्ष्मणगढ़ में पहली बार बोर्ड का गठन तो हो गया है, लेकिन नवगठित बोर्ड के सामने कस्बे की समस्याओं के निस्तारण को लेकर कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं। सफाई, पानी, रोशनी और कार्यालय में जगह की कमी जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है।
पालिका क्षेत्र की 7 प्रमुख चुनौतियां बनीं सिरदर्द:
-
सफाई व्यवस्था ठप व संक्रामक रोगों का खतरा: पिछले 15 दिनों से सफाई कर्मियों को अनुभव प्रमाण पत्र न मिलने के विरोध में हड़ताल जारी है। मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक कचरे के ढेर लगे हैं, जिससे डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ गया है और व्यापारियों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। नालियों की अधूरी सफाई से दुर्गंध फैल रही है।
-
स्ट्रीट लाइटों का खराब रखरखाव: शहर के मुख्य मार्गों व नए वार्डों में रोशनी व्यवस्था चरमराई हुई है। दिन में लाइटें जलने और रात में बंद रहने की शिकायतें आम हैं, जिससे दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
-
जलभराव व खराब जल निकासी: बारिश और सामान्य दिनों में भी उचित जल निकासी न होना कस्बे के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है।
-
पालिका कार्यालय में सभा भवन का अभाव: गठित होने के 5 वर्ष बाद भी नगर पालिका कार्यालय पुराने ग्राम पंचायत भवन में ही संचालित है, जहां अधिकारियों-कर्मचारियों के बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं है। जागरूक नागरिक गंगा लहरी प्रजापत के अनुसार सभा भवन न होने से बोर्ड की बैठकें और जनसमस्याओं का निराकरण प्रभावित होगा।
-
बंदरों का आतंक: कस्बे में बंदरों के आतंक से लोग सहमे हुए हैं। बंदर छोटे पौधों को नष्ट करने के साथ घरों से सामान ले जाते हैं और बच्चों व राहगीरों को घायल कर चुके हैं।
-
मीठे पेयजल की किल्लत: जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन बिछाए जाने के बावजूद आज तक कस्बे वासियों को पीने का मीठा पानी नसीब नहीं हो सका है।
-
आवारा पशुओं की समस्या: बाजारों और मोहल्लों में आवारा पशुओं के जमावड़े और आपसी भिड़ंत के कारण आए दिन राहगीर व वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं।
प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि नवगठित बोर्ड और जनप्रतिनिधियों के लिए इन विकराल समस्याओं का समाधान करना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन जमीनी मुद्दों पर कितनी जल्द संज्ञान लेते हैं।

