सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद JDA का बड़ा एक्शन: चिमनपुरा में अवैध व्यावसायिक दुकानों पर चला सीलिंग का डंडा
जयपुर में मास्टर प्लान के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद JDA ने की बड़ी सीलिंग कार्रवाई
जयपुर (राजस्थान): जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने शहर के चिमनपुरा इलाके में मास्टर प्लान और लैंड यूज़ (भूमि उपयोग) के नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई अवैध व्यावसायिक दुकानों के खिलाफ सीलिंग की बड़ी कार्रवाई की है। चिमनपुरा में कृषि और खुली जमीनों पर व्यावसायिक निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिस पर अब JDA का डंडा चला है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और 2 हफ्ते का अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट ने JDA क्षेत्र में मास्टर प्लान के कथित उल्लंघनों पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने पाया कि JDA की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्ष अपीलीय ट्रिब्यूनल से अंतरिम आदेश (स्टे) ले लेते हैं, जिससे सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।
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अल्टीमेटम: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल में लंबित ऐसे सभी मामलों को मात्र दो सप्ताह के भीतर तय करने के निर्देश दिए हैं।
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जवाबदेही तय: कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी को इस आदेश के अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
अदालती आदेशों और राहत के दावों के बीच फंसा मामला
चिमनपुरा कार्रवाई के बाद प्रभावित पक्ष JDA अपीलीय ट्रिब्यूनल, राजस्व मंडल और संभागीय आयुक्त स्तर से राहत मिलने का दावा कर रहे हैं।
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इससे पहले, जयपुर संभागीय आयुक्त वी. सरवाना ने अपील संख्या 877/2025 में JDA जोन-2 के एक पुराने 90-B आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिसमें 'राजदरबार पिंक सिटी प्रोजेक्ट' से जुड़ी जमीन शामिल है।
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याचिकाकर्ताओं ने मूल कार्रवाई में उचित नोटिस न देने का आरोप लगाया था। इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की गई है।
क्या अब चलेगा बुलडोजर?
सीलिंग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आगे की ध्वस्तीकरण (Demolition) कार्रवाई को लेकर है। JDA द्वारा निर्माण स्वीकृति, भूमि उपयोग और न्यायालय से प्राप्त अंतरिम स्टे आदेशों के विधिक परीक्षण के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। यदि निर्माण पूरी तरह गैर-कानूनी पाए जाते हैं और कोई प्रभावी अदालती रोक नहीं रहती है, तो अवैध निर्माणों को ढहाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवरों के बाद अब यह मामला सिर्फ चिमनपुरा की दुकानों तक सीमित न रहकर, पूरे जयपुर में मास्टर प्लान बदलकर किए गए अवैध निर्माणों पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा नजीर बन सकता है।

