लक्ष्मणगढ़ जैन मंदिर में सुगंध दशमी की धूम: दशांग धूप की आहुतियों से महका वातावरण, श्रद्धालुओं ने किया उत्तम संयम धर्म का पालन
पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन समाज ने पूर्ण श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया सुगंध दशमी (धूप दशमी) का पावन पर्व
लक्ष्मणगढ़, अलवर (कमलेश जैन): लक्ष्मणगढ़ कस्बे के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के छठे दिन 'सुगंध दशमी' का पर्व भक्तिभाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने प्रभु भक्ति के साथ दशांग धूप की आहुतियां देकर मन और वातावरण की शुद्धि की याचना की।
प्रातःकाल पूजन और शांतिधारा से हुई शुरुआत
सुबह मंदिर जी में भगवान श्री जी की प्रतिमा का जलाभिषेक और पूजन-प्रक्षाल किया गया। इसके बाद विश्व शांति की कामना के साथ शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने देव पूजा, सोलहकारण पूजा, दशलक्षण पर्व पूजा और छठे दिन के प्रतीक 'उत्तम संयम धर्म' की विशेष पूजा-अर्चना की।
संध्याकाल में हुआ धूप दशमी अनुष्ठान
संध्या के समय जैन समाज के बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ सुगंध दशमी की कथा से हुआ। श्रद्धालुओं ने अष्टकर्मों के क्षय (नाश) के लिए निर्वाण कांड का पाठ करते हुए हवन कुंड में आहुतियां दीं। कथा के उपरांत चौबीस तीर्थंकरों के समक्ष अग्नि कुंड में दशांग धूप खेवकर वातावरण को सुगंधित और पवित्र बनाया गया।
संयम से ही जीवन में मिलती है सच्ची सुख-शांति
कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिनिधि मोनित जैन (माणक चंद्र) ने दशलक्षण पर्व के छठे दिन का महत्व बताते हुए कहा कि उत्तम संयम धर्म हमें अपनी इंद्रियों को वश में रखकर मर्यादित जीवन जीने की सीख देता है। संयमी प्राणी ही जीवन में सच्चा सुख प्राप्त करता है। उन्होंने बताया कि इस दिन हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह जैसे पांचों पापों का त्याग कर पूजा, स्वाध्याय, धर्म चिंतन और सामायिक में समय बिताना चाहिए।
22 सितंबर को होगी 'उत्तम तप धर्म' की पूजा
श्रद्धालुओं ने पूरे दिन व्रत-उपवास रखकर और प्रभु भक्ति में लीन होकर सुगंध दशमी का पर्व मनाया। इसी श्रृंखला में दिगंबर जैन मंदिर में 22 सितंबर को 'उत्तम तप धर्म' की विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

