विचारों की शक्ति और मानव जीवन के आत्म-परिवर्तन की क्षमता पर केंद्रित - महंत माधव दास
सोयला (बावड़ी/ मिश्रीलाल लखारा) बावड़ी उपखंड के सोयला गाँव में आयोजित चातुर्मास महोत्सव के तहत प्रतिदिन भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान संत माधवदास महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा सोचता है, उसका व्यक्तित्व और जीवन धीरे-धीरे उसी दिशा में ढलता चला जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- विचार ही बनते हैं व्यवहार और चरित्र
संत माधवदास ने कहा कि अन्य प्राणियों का जीवन मुख्यतः प्रकृति द्वारा निर्धारित होता है, जबकि ईश्वर ने मनुष्य को अपने विचारों, संगति और संस्कारों को बदलकर स्वयं को ढालने की अद्भुत क्षमता दी है। जीवन के अंतिम क्षण तक व्यक्ति में सुधार और परिवर्तन की गुंजाइश बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विचार ही व्यवहार बनते हैं, व्यवहार से चरित्र का निर्माण होता है और चरित्र से ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व बनता है।
- हृदय में ईश्वर का वास, सत्कर्मों से ही आत्मज्ञान
सत्संग के दौरान "सुकरत फूल गुलाब रो हेली..." भजन की प्रस्तुति दी गई। इस भजन की व्याख्या करते हुए महाराज ने कहा कि आत्मा सदा अमर और अजर है तथा सुकृत (सत्कर्म) का सागर प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान है। भगवान बाहर ढूंढने से नहीं, बल्कि गुरु महाराज की असीम कृपा और सत्कर्मों के माध्यम से अपने भीतर ही प्राप्त होते हैं।
- कई गांवों से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सत्संग कार्यक्रम में आश्रम के देवदास महाराज, प्रकाश महाराज, बाल संत गोपाल महाराज सहित कई साध्वियों ने भी विचार, भजन व प्रवचन प्रस्तुत किए। इस अवसर पर सोयला सहित खुडाला, नागड़ी, मोरनावडा, आसंडा, छीन्डीया, ढढोरा, चटालिया, धनारी, मगेरिया तथा लूणावास आदि आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ उठाया।

