पंचायती राज चुनाव का बिगुल बजते ही गांवों में गरमाया सियासी पारा: चाय की थड़ियों से लेकर चौपालों तक चर्चाएं तेज
बावड़ी (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा: राजस्थान पंचायती राज चुनावों के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने और चुनावी कार्यक्रम तय होते ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। बावड़ी, खेड़ापा, कजनाऊ कलां, सोयला, मैलाणा, लवेरा कलां और धनारी कलां सहित आसपास के गांवों व ढाणियों में चुनावी पारा चढ़ने लगा है।
चाय की थड़ियां और चौपालें बनीं चुनावी केंद्र
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और जिला प्रमुख पदों के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। गांवों की चौपालों, हथाइयों और चाय की थड़ियों पर सुबह से शाम तक चुनावी गणित, संभावित प्रत्याशियों के नामों और स्थानीय समीकरणों पर मंथन चल रहा है।
समर्थन जुटाने में जुटे दावेदार, समाजवार बैठकों का दौर जारी
संभावित प्रत्याशी ग्रामीणों का रुख भांपने के लिए व्यक्तिगत संपर्क साध रहे हैं। अपने-अपने समाज के प्रबुद्धजनों के साथ बैठकों का दौर जारी है, वहीं अन्य समाजों के पंचों, पूर्व सरपंचों और प्रभावशाली ग्रामीणों को भी साधने की कवायद तेज हो गई है। दूसरी ओर, आम मतदाता भी दावेदारों की सामाजिक पकड़, पुराने कामकाज और छवि को लेकर आपस में चर्चा कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस-प्रशासन सतर्क
चुनावी माहौल के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने और चुनावों में नशे के संभावित उपयोग पर लगाम लगाने के लिए जागरूकता अभियानों और रैलियों के जरिए संदेश दिए जा रहे हैं। संदिग्ध गतिविधियों और चुनावी प्रलोभनों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

