नदी सूखी, पर सबसे ऊंचे पुल पर ‘सैलाब’: प्रशासनिक अनदेखी के शिकार नसवारी में गंदे पानी से गुजरने को मजबूर नौनिहाल
अधिकारियों की गाड़ियों के पहियों तले रौंदा जा रहा जनता का दर्द; PWD बोला— 30 करोड़ मांगे थे, मिले सिर्फ 3 करोड़!
गोविंदगढ़ (अलवर)। सरकारी सिस्टम के ढुलमुल रवैये और प्रशासनिक अंधी दौड़ का इससे बदतर नमूना क्या होगा कि जिस रूपारेल नदी के नीचे पानी का नामोनिशान नहीं है, उसी नदी पर बने क्षेत्र के सबसे ऊंचे पुल की सड़क पर बदबूदार गंदा पानी लबालब भरा हुआ है! ग्राम पंचायत नसवारी को गोविंदगढ़-रामगढ़ मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला यह पुल इन दिनों महकमे की लापरवाही और घोर बदहाली की जीती-जागती तस्वीर बना हुआ है।
मासूमों की सेहत और सुरक्षा पर मंडराया खतरा
पुल पर जल निकासी (ड्रेनेज) का कोई इंतजाम न होने से स्थिति नारकीय हो चुकी है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे इसी दूषित और बदबूदार पानी में छप-छप करते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बदबू के बीच संक्रमण फैलने और फिसलन के कारण किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
साहब गुजरते हैं शीशे चढ़ाकर, ग्रामीणों का दर्द कौन सुने?
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे तीखे सवाल दागे हैं:
- बलजीत सिंह (स्थानीय निवासी): "यह पूरे इलाके का सबसे ऊंचा पुल है, फिर भी निकासी न होना साफ दर्शाता है कि निर्माण में कितनी लापरवाही बरती गई है। हमारे बच्चे हर दिन बीमारी का जोखिम उठाकर स्कूल जाते हैं।"
- हनीफ खान (स्थानीय निवासी): "इस रास्ते से आए दिन प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की गाड़ियां गुजरती हैं। अफसर बंद गाड़ियों में नजरें चुराकर निकल जाते हैं। क्या प्रशासन किसी मासूम की बलि लेने के बाद ही नींद से जागेगा?"
बजट का रोना और 'आश्वासन' का मरहम
मामले पर सफाई देते हुए PWD के सहायक अभियंता तरुण शर्मा ने बताया कि विभाग ने नसवारी चौकी से नौगांवा मार्ग के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन महज 3 करोड़ रुपये ही स्वीकृत हुए। फिलहाल नौगांवा से बाबा लालदास तक सड़क का निर्माण चल रहा है और बाकी धनराशि अगले बजट में मिलने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि नसवारी पुल पर जलभराव की समस्या का जल्द निस्तारण कर आवागमन सुचारू कर दिया जाएगा।

