राजस्थान की राजनीति में खैरथल की अनूठी चुनावी रणभेरी; 45 वार्डों पर टिकी नजर, शहर के नाम का मुद्दा भी बना चुनावी चर्चा का केंद्र
खैरथल (हीरालाल भूरानी) नगर परिषद चुनाव की तारीख नजदीक आते ही खैरथल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगता नजर आ रहा है। गली-मोहलों की चौपाल हो या बाजार की चाय की दुकान, हर जगह इन दिनों एक ही चर्चा है-45 वार्डों में जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनेगी और इन चुने हुए पार्षदों के बीच से नगर परिषद की कमान किसके हाथ जाएगी? आगमी 9 सितंबर को होने बाले मतदान ने शहर की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता, वार्डवार समीकरण और सभापति की कुर्सी को लेकर बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों ने चुनाव को खासा रोचक बना दिया है।
सिर्फ पार्षद का चुनाव नहीं, खैरथल की नई राजनीतिक दिशा का फैसला
इस बार का चुनाव महज पार्षद चुनने तक सीमित नजर नहीं आ रहा। नगर पालिका से नगर परिषद में क्रमोत्रयन और क्षेत्र के विस्तार के चाद चुनाव का दायरा भी बढ़ा है। आसपास के कुछ गांव परिषद क्षेत्र में शामिल होने से नए मतदाता भी पहली बार नगर परिषद की राजनीति में निर्माणक भूमिका निभाएंगे। सड़क, सफाई, पानी, जल निकासी, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के साथ शहर के भविष्य और विकास की दिशा भी मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। पुराने राजनैतिक समीकरणों के साथ नए क्षेत्रों का रुख इस चुनाव में कई परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
जिला मुख्यालय और शहर के नाम का मुद्दा फिर सुर्खियों में
खैरथल को जिला घोषित किए जाने के बाद जिला मुख्यालय और शहर के नाम को लेकर चली कवायद ने भी चुनावी माहौल में अपनी जगह बना ली है। पिछले लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर विभित्र स्तरों पर आंदोलन और प्रयास होते रहे हैं। नई अनाज मंडी में चले जिला बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलन ने भी इसे शहर की राजनीतिक बास का महत्वपूर्ण विषय बनाया। अब चुनाव के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे से जुड़े आंदोलनकारियों और समर्थकों की राजनीतिक सक्रियता मतदाताओं के फैसले को किस हद तक प्रभावित करती है।
45 वार्डों में कई मुकाबले बने आकर्षण का केंद्र
नगर परिषद के 45 वार्षों में होने वाले चुनाव में कई वार्डों के मुकाबले पर शहर की विशेष नजर है। वार्ड नंबर 18 में व्यापार समिति अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता, वाई नंबर 2 में उपसभापति वरुण डाटा, वार्ड नंबर 12 में गिरीश डाटा और वाई नंबर 32 में राम सिंह शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने इन वार्डों की चुनावी चर्चा को खासा गर्म कर दिया है।
वहीं पूर्व सभापति हरीश रोघा,वरिष्ठ पत्रकार हीरालाल भूरानी,पूर्व प्रधान ओमप्रकाश रोघा और एडवोकेट भानु प्रकाश जैसे चर्चित चेहरों से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी शहर में चर्चा का विषय बने हुए है। कई वार्डो में पार्टी समर्थन के साथ व्यक्तिगत संपर्क, सामाजिक समीकरण और प्रत्याशी की स्थानीय पकड़ मुकाबले की दिशा तय कर सकती है।
नए जुड़े गांवों से बदल सकता है चुनावी गणित
नगर परिषद क्षेत्र के विस्तार के बाद शामिल हुए आसपास के गांव इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन क्षेत्रों में पहली चार नगर परिषद की राजनीति को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताएं और शहरी क्षेत्रों की समस्याएं अलग होने के कारण प्रत्याशियों को दोनों तरह के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी।
राजनीतिक जानकारों की निगाह इस बात पर भी होगी कि नए जुड़े क्षेत्रों के मतदाता किस दिशा में मतदान करते हैं और उनके फैसले का परिषद के सम्हा सत्ता समीकरण पर कितना असर पड़ता है।
सभापति की कुर्सी सबसे बड़ा आकर्षण
पार्टी के चुनाव परिणामों के साथ सबसे ज्यादा चर्चा नगर परिषद सभापति की कुर्सी को लेकर है। प्रत्येक वार्ड का परिणाम केवल स्थानीय जीत-हार नहीं होगा, बल्कि परिषद में बनने वाले बहुमत और सत्ता के समीकरणों को भी प्रभावित करेगा। चुनावी चौपालों में प्रत्याशियों की जीत के साथ यह सवाल भी तैर रहा है कि कौन से पार्षद किस खेमे को मजबूती देंगे और आखिर परिषद की कमान किसके हाथ पहुंचेगी। यही कारण है कि सभापति की दौड़ ने 45 वार्डों के मुकाबले को और भी महावपूर्ण बना दिया है।
9 सितंबर को जनता लिखेगी खैरथल की नई राजनीतिक पटकथा
फिलहाल खैरथल की सियासी चौगलों में दायों, समीकरणों और संभावनाओं का दौर चल रहा है। कहीं प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चर्चा में है तो कहीं पार्टी समर्थन और सामाजिक समीकरणों की गणित ताई जा रही है। इसी बीच शहर के नाम, जिला मुख्यालय और परिषद क्षेत्र के विस्तार जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर सकते हैं।
लेकिन अंतिम फैसला चुनावी चर्चाओं में नहीं, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की मुहर से होगा। 9 सितंबर को खैरथल की जनता 45 वार्डों में अपना फैसला सुनाएगी और इसी फैसले से तय होगी नगर परिषद की नई राजनीतिक तरबीर। अब देखना यह है कि चुनावी रण में कौन बाजी मारता है और आखिर खैरथल की नगर परिषद की कुर्सी तक पहुंचने की राह किसके लिए आसान होती है।

