खैरथल में 'दिव्यांगों की आस' बना विशेष अभियान: 15 दिनों में घर-घर पहुंचे प्रशिक्षणार्थी, चिन्हीकरण के साथ खोला पुनर्वास का रास्ता
खैरथल में सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रम का समापन, 15 दिनों में घर-घर पहुंचकर दिव्यांग बच्चों का हुआ चिन्हीकरण
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। कौशल्याम इंस्टिट्यूट फॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर, खैरथल के 'डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन' (D.Ed. Special Education) द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा ग्रामीण इलाकों में चलाया जा रहा 15 दिवसीय सामुदायिक आधारित पुनर्वास कार्यक्रम (CBR) आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।
इस 15 दिवसीय विशेष अभियान के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने कोटकासिम पंचायत समिति के हरसोली, नगली जाटान व पतलिया तथा किशनगढ़बास पंचायत समिति के किशनगढ़बास, गंज व बास कृपाल नगर में घर-घर और समुदाय स्तर पर सघन संपर्क साधा। टीम ने शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं से वंचित दिव्यांग बच्चों की पहचान की और उनके शैक्षणिक, सामाजिक व चिकित्सकीय आकलन के बाद अभिभावकों को सही राह दिखाई।
अभियान की मुख्य झलकियां:
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सरकारी योजनाओं की जानकारी: परिवारों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाने, विशेष शिक्षा, चिकित्सीय परामर्श और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का काम किया गया।
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विस्तृत रिपोर्ट पेश: समापन अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों ने अभियान की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें चिन्हित बच्चों की स्थिति और उन्हें दी गई मदद का ब्योरा शामिल था।
अंबेडकर छात्रावास में जुटा दिग्गजों का जमावड़ा: समापन समारोह राजकीय अंबेडकर छात्रावास में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में सहायक निदेशक (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग) महेंद्र कुमार, पंडित छीतरमल लाटा वेलफेयर सोसाइटी के निदेशक डॉ. प्रभाकर शर्मा, दिव्यांग कल्याण संस्थान के जिलाध्यक्ष संजीव यादव, वरिष्ठ पत्रकार हीरालाल भूरानी, प्रमोद केवलानी तथा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जुबेर खान मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
अतिथियों ने युवाओं के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि समय पर दिव्यांगता की पहचान ही पुनर्वास का पहला कदम है। जब तक समुदाय खुद आगे नहीं आएगा, तब तक दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना संभव नहीं है।

