निकाय चुनाव में विकास के मुद्दे गौण, कई वार्डों में जातीय समीकरण हावी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) नगर पालिका का चुनाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी के सबसे करीब होता है। यहां 11 सितंबर को मतदान होने जा रहे हैं । मतदाताओं का उम्मीदवार से यह पूछना ज्यादा जरूरी है कि वह हमारे वार्ड की नाली कब साफ करवाएगा, कचरा कब उठाया जाएगा।और मीठे पीने के पानी की समस्या कैसे दूर होगी? बस्तियों के मतदाताओं को इस बार अपने सवाल थोड़े बदलने चाहिए। केवल यह पूछने के बजाय कि कौन जीतेगा, यह पूछा जाना चाहिए कि क्या आप चुनाव के बाद भी हमारे लिए उपलब्ध रहेंगे? क्योंकि चुनाव के समय बस्ती में जाना आसान है। असली परीक्षा चुनाव के बाद होती है।
चुनावों में स्थानीय नागरिकों से जुड़े बुनियादी सवाल,निर्बाध पेयजल आपूर्ति, नियमित साफ-सफाई, सड़कों की मरम्मत और शहर में जलभराव का स्थायी समाधान रोशनी व्यवस्था मुख्य एजेंडा होने चाहिए ।जबकि कई वार्डों में अब चुनाव में जातीय समीकरणों और धनबल संभावित उपयोग की चर्चाएं हावी होती दिख रही हैं।
विकास के मुद्दे गौण जातीय समीकरण हावी, वार्डों में घर-घर जाकर वोट मांग रहे प्रत्याशियों की सक्रियता तो बढ़ी है, लेकिन चुनावी चर्चाओं का रुख बदल गया है। प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में विकास की कार्ययोजना पेश करने के बजाय अपने समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों को साधने के लिए जातीय गणित बैठाने में जुटे हैं। व्यक्तिगत संपर्क और आश्वासनों के इस दौर में शहर की वास्तविक और लंबे समय से लंबित समस्याएं चुनावी बहस से दूर होती नजर आ रही हैं।
निष्पक्ष मतदान कराना प्रशासन के लिए भी चुनौती
बढ़ती चुनावी सरगर्मियों के बीच अब सबसे अहम सवाल निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान को लेकर है। चुनाव पर्यवेक्षक और जागरूक नागरिकों का मानना है कि मतदान के अंतिम दिनों में अब वर्तमान में क्षेत्र में सतर्कता और फ्लाइंग स्क्वाड की निगरानी बढ़ानी होगी।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती वार्डों में सुरक्षा का पुख्ता ढांचा खड़ा करने और संभावित प्रलोभन देने की कोशिशों पर अंकुश लगाने की है, ताकि मतदाता बिना किसी भय, दबाव या लालच के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर शहर के प्रतिनिधि चुन सके।

