पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का जहाजपुर आगमन, धर्मसभा में दिया साधना का संदेश

Jun 25, 2025 - 12:46
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पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का जहाजपुर आगमन, धर्मसभा में दिया साधना का संदेश

जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) — प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का ससंघ भव्य आगमन स्वस्तिधाम, जहाजपुर में हुआ। आगमन से पूर्व गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित अगवानी की और आचार्य वंदना तथा भक्ति परिक्रमा के साथ मंगल प्रवेश कराया।

श्रद्धा से ओतप्रोत इस अवसर पर स्वस्तिभूषण माताजी, प्रियंका दीदी और किशोर जैन इंदौर द्वारा केसर से आचार्य श्री के चरणों का प्रक्षालन किया गया। इसके बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया जिसमें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भावपूर्ण प्रवचन में जीवन, धर्म, संयम और संस्कृति की रक्षा पर विस्तृत विचार रखे।

उन्होंने कहा, "साधुओं में आचार्य श्री शांति सागर जी और तीर्थों में श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन सभी श्रावकों-श्राविकाओं को अवश्य करने चाहिए।" आचार्य श्री ने बताया कि श्री शांति सागर जी ने चारित्र के छह खंडों पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए उन्हें चक्रवर्ती की उपमा दी जाती है। उन्होंने अपने जीवन से धर्म और संस्कृति की रक्षा की।

प्रवचन में उन्होंने समवशरण, दर्शन, अभिषेक, पंचकल्याणक, सांसों का महत्व, और जीवन में धर्म के प्रयोग पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं को चेताया कि तीर्थ क्षेत्र संयम साधना के स्थल हैं, इन्हें आमोद-प्रमोद का केंद्र न बनाएं।

आचार्य श्री ने कहा – "जिनालय में भगवान के दर्शन श्रद्धा से करें और प्रतिमा से मिलने वाले संदेश को आत्मसात करें। पांच मिनट का आत्मचिंतन जीवन की दिशा बदल सकता है। न्याय और नीति से अर्जित धन को धर्म में लगाना ही सच्चा दान है।"

धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने तत्वार्थ सूत्र के छठे अध्याय का उल्लेख करते हुए सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र की विवेचना की। उन्होंने कहा, "सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है, प्रसिद्धि लौकिक ज्ञान से और सिद्धि रत्नत्रय धर्म से प्राप्त होती है।"

धर्मसभा का समापन इस घोषणा के साथ हुआ कि आचार्य श्री का 36वां आचार्य पदारोहण दिवस 27 जून 2025 को स्वस्तिधाम जहाजपुर में मनाया जाएगा। इस अवसर पर अनेक नगरों से श्रद्धालु सम्मिलित होंगे और चातुर्मास निवेदन करेंगे। उसी दिन आचार्य श्री चातुर्मास स्थल की घोषणा भी करेंगे।

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