यूजीसी बिल के समर्थन में ओबीसी, एससी, एसटी समाज ने सौंपा ज्ञापन
भरतपुर रूपवास ( लेखेन्द्र सिंह बंशीवाल): कस्बे सहित क्षेत्र में रैली निकाल यूजीसी के विरोध में ओबीसी एससी एसटी समाज ने यूजीसी के समर्थन में उपखण्ड अधिकारी विष्णु बंसल को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन दिया।
ओबीसी एससी एसटी समाज ने यूजीसी के समर्थन में दिए ज्ञापन में लिखा कि 8 दिसम्बर 1953 को यूजीसी बिल का गठन हुआ था। जिसको पारित करने में कांग्रेस व बी.जे.पी. सरकार ने लंबित रखा। देश में ओबीसी, एससी, एसटी माइनॉरिटी वर्ग का अनुपात 90 से 95% है। 17 जनवरी 1989 को मंडल कमीशन आयोग का विरोध मंडल कमीशन के माध्यम से किन्हीं चन्द 10% लोगों ने विरोध किया। परन्तु ईडब्ल्यूएस का विरोध किसी ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के लोगों ने नहीं किया।
संविधान के मौलिक अधिकार समानता के अधिकार के अनुसार कोलिजियम में हो रहे ओबीसी, एससी, एसटी के अत्याचार को देखते हुए यूजीसी बिल को भाजपा सरकार ने लागू किया। परन्तु किन्हीं चन्द जाति वर्ग के चालाक लोगों ने विरोध किया जबकि यह बिल समानता की बात करता है।
राजस्थान सरकार से अनुरोध किया जाता है कि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद और सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में जनरल क्लास के जज होने की बजह से स्टे दे दी गई। यह न्यायपालिका का घिनौना कृत्य है। जिसको ओबीसी, एसटी, एससी माइनॉरिटी सहन नहीं कर पाएगी। भाजपा सरकार का राज्यसभा, लोकसभा में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद भी यूजीसी बिल को पारित करने में दिक्कत आ रही है और ओबीसी, एससी, एसटी का अनुपात देश में 90% होने के बावजूद भी ओबीसी, एससी, एसटी को न्याय नहीं मिल पा रहा है। हम ओबीसी, एससी, एसटी, यूजीसी बिल का पूर्णतः समर्थन करते हैं। अगर यह बिल पारित नहीं किया गया तो देश की ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग उग्र आन्दोलन के लिये आश्रित होगी।

