लक्ष्मणगढ़ में बावड़ी से भगत सिंह सर्किल तक अतिक्रमण के नाम पर ध्वस्त मकान एवं दुकानों को लेकर विधायक मांगेलाल ने विधानसभा मे बताया भानगढ़
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) नगर पालिका द्वारा बावड़ी से भगत सिंह सर्किल तक अतिक्रमण के नाम से हटाए गए पिछले दिनों जनवरी माह में मकानों एवं दुकानों को ध्वस्त के बाद जो तस्वीरें और कहानियां सामने आई
हैं, वह वाकई_हृदयविदारक हैं। जब किसी का बरसों पुराना आशियाना या रोजी-रोटी का जरिया एक झटके में ढह जाता है, तो वह केवल ईंट-पत्थर का नुकसान नहीं होता, बल्कि एक परिवार के सपनों और सुरक्षा का अंत होता है।अक्सर व्यवस्था 'नियमों' के भारी बोझ तले मानवीय संवेदनाओं को दबा देती है। प्रशासन के लिए जो 'अवैध निर्माण' है, वह एक आम आदमी के लिए उसके जीवन भर की पूंजी है।
ऐसे समय पर राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के स्थानीय विधायक मांगेलाल मीणा ने विधानसभा में प्रश्न उठाया उन्होंने बताया कि सन 1954 के नक्शे के आधार पर यह रोड मात्र 18 फुट का दर्ज है। राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद भी प्रशासन द्वारा यह तोड़फोड़ किसके तुगलकी फरमान से कार्रवाई की गई है । कस्बे लक्ष्मणगढ़ को भानगढ़ बना दिया गया है। जांच की मांग कर हित धारकों को मुआवजा राशि दी जाने की मांग राज्य सरकार से की है। पीड़ित लोगों की आवाज विधानसभा में उठाकर बेघर या बेरोजगार हो गए लोगों ने क्षेत्रीय विधायक का आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने दूरभाष पर बताया कि निर्माण वैध था प्रभावित पक्ष मुआवजे का हकदार है।नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन एवं राज्य सरकार पर इस बात का दबाव बनाया जाएगा, सरकार और नगर पालिका की यह जिम्मेदारी बनती है कि यदि किसी का वैध आवास या पुराना बसेरा हटाया गया है, तो उन्हें 'मुख्यमंत्री जन आवास योजना' या अन्य सरकारी हाउसिंग स्कीमों के तहत प्राथमिकता के आधार पर जगह दी जाए। एवं मुआवजा दिए जाने की यह मांग मेरे द्वारा विधानसभा में किया जाना जायज है। यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। जब प्रशासन अतिक्रमण के नाम पर मकान एवं दुकानों के वैध दस्तावेजों एवं राजस्थान हाई कोर्ट के स्टे को नकारते हुए मकान एवं दुकानों को ध्वस्त कर इसके पीछे छिपे मानवीय पक्ष को नजरअंदाज किया है। वर्षों से बसे हुए आवास या रोजी-रोटी का अचानक छिन जाना किसी भी परिवार के लिए एक मानसिक और आर्थिक आपदा जैसा है।


