'परिंडा लगाओ, पक्षी बचाओ' अभियान की शुरुआत शिक्षाविद बलेश पटेल पोसवाल बनी मुकबधिर प्राणियों की जीवन रक्षक
भुसावर (विष्णु मित्तल) पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता के संवर्धन को लेकर आज के समय में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद बलेश पटेल पोसवाल द्वारा संचालित “परिंडा लगाओ, पक्षी बचाओ” अभियान के अंतर्गत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवली भुसावर में एक विस्तृत एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल पक्षियों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ करने वाला रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में हुई, जहाँ गर्मी के मौसम में पक्षियों को जल संकट से बचाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर परिंडे लगाए गए। विद्यालय के पेड़ों, दीवारों एवं खुले स्थानों पर इन परिंडों को व्यवस्थित रूप से लगाया गया ताकि अधिक से अधिक पक्षी इसका लाभ उठा सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह था कि भीषण गर्मी के दौरान पानी की कमी से जूझ रहे पक्षियों को राहत प्रदान की जा सके और उनके जीवन की रक्षा की जा सके।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों एवं स्टाफ सदस्यों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे न केवल विद्यालय स्तर पर बल्कि अपने घरों एवं आस-पास के क्षेत्रों में भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। सभी ने यह भी निश्चय किया कि वे नियमित रूप से इन परिंडों में पानी भरने का कार्य करेंगे, ताकि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम न रहकर एक सतत प्रक्रिया बन सके।
कार्यक्रम के दौरान एक अध्यापिका ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे कोरोना काल से ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उस कठिन समय में जब लोग अपने घरों तक सीमित थे, तब उन्होंने वृक्षारोपण, पौधों की देखभाल तथा पर्यावरण जागरूकता के लिए निरंतर प्रयास किए। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करे, तो पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को भी प्रेरित किया कि वे प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें और अपने जीवन में पर्यावरण के महत्व को समझें।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेश बेरवा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान, जल संकट एवं प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में “परिंडा लगाओ, पक्षी बचाओ” जैसे अभियान न केवल पक्षियों के जीवन को बचाने मंं सहायक हैं, बल्कि समाज को भी जागरूक करने का कार्य करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे इस प्रकार की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने परिवार व समाज में भी इस संदेश को फैलाएं।
प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र होने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम होता है। इसलिए विद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी शिक्षकों एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का सपना साकार हो सकता है।
इस कार्यक्रम में नेतराम, लल्लू राम मीणा, लक्ष्मण मीणा, सिद्धि लाल, रामावतार चौधरी, दीपक शर्मा, हीरा, चित्रा, अंजू सहित समस्त विद्यालय स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर न केवल परिंडे लगाए, बल्कि उनके नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी भी ली। इसके साथ ही ग्रामवासियों ने भी इस अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे अपने-अपने घरों एवं मोहल्लों तक ले जाने का संकल्प लिया।
ग्रामवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पक्षियों का संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि हम आज उनके लिए छोटे-छोटे प्रयास नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने यह भी निश्चय किया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करेंगे, जल संरक्षण को बढ़ावा देंगे तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का प्रयास करेंगे। साथ ही यह भी तय किया गया कि विद्यालय में समय-समय पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
यह कार्यक्रम न केवल एक सामाजिक पहल के रूप में सफल रहा, बल्कि यह संदेश देने में भी सफल रहा कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर प्रयास करें, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है। “परिंडा लगाओ, पक्षी बचाओ” अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस प्रकार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवली भुसावर में आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा, जिसने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक स्तर पर भी सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया।