रील बनाने के चक्कर में 60 फीट ऊंची टंकी पर मौत का तांडव, 5 बच्चों में से एक की मौत; एयरफोर्स ने हेलिकॉप्टर से किया 2 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू

May 3, 2026 - 19:27
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रील बनाने के चक्कर में 60 फीट ऊंची टंकी पर मौत का तांडव,  5 बच्चों में से एक की मौत; एयरफोर्स ने हेलिकॉप्टर से किया 2 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू

सिद्धार्थनगर (यूपी/ शशि जायसवाल)। जनपद के काशीराम आवास कॉलोनी में शनिवार को रील बनाने के जुनून ने एक मासूम की जान ले ली और चार अन्य बच्चों के जीवन को संकट में डाल दिया। 60 फीट ऊँची जर्जर पानी की टंकी की सीढ़ी टूटने से हुए इस हादसे के बाद, ऊपर फंसे दो बच्चों को रविवार सुबह भारतीय वायुसेना (IAF) के MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

शनिवार दोपहर करीब 3 बजे पाँच किशोर (बाले, गोलू, शनि, कल्लू और पवन) रील बनाने के उद्देश्य से कॉलोनी स्थित पुरानी व जर्जर पानी की टंकी पर चढ़े थे। वापस उतरते समय अचानक लोहे की जर्जर सीढ़ी भरभरा कर टूट गई। हादसे में तीन बच्चे नीचे गिर गए, जिनमें से 12 वर्षीय बाले (सिद्धार्थ) की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई। शनि और गोलू गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कल्लू और पवन टंकी के ऊपरी हिस्से पर ही फंस गए।

चुनौतियों भरा रेस्क्यू ऑपरेशन,  लेनी पड़ी एयरफोर्स की मदद 

  1. पानी की टंकी के चारों तरफ पानी भरा है। इस वजह से जमीन दलदल जैसी हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए गोरखपुर से हाइड्रॉलिक क्रेन मंगाई गई। इसमें लिफ्ट लगी होती है, जो सीढ़ी के जरिए 135 फीट ऊंचाई तक जाती है।
  2. पहले हाइड्रॉलिक क्रेन का मेन सड़क पर ट्रायल किया गया। इस दौरान उसके लिफ्ट सेंसर में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद लखनऊ से क्रेन मंगाई गई। दूरी ज्यादा होने की वजह से देर होने लगी तो बचाव का अन्य रास्ता पर तलाशा गया।
  3. इसके बाद सड़क बनाकर टंकी तक पहुंचने का रास्ता अपनाया गया। जल्द ही 150 मीटर तक सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। तीन जेसीबी और एक पोकलेन की मदद से देर रात तक 120 मीटर सड़क तैयार कर ली गई। फिर मौसम खराब हो गया। इसके बाद वायुसेना की मदद मांगी गई।
  4. वायुसेना का हस्तक्षेप: बच्चों की जान खतरे में देख जिला प्रशासन ने सेना से संपर्क किया। रविवार सुबह करीब 5:20 बजे गोरखपुर से पहुँचे एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर ने महज 15 मिनट के साहसिक ऑपरेशन में दोनों बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया।

मौके पर DM शिवशरणप्पा जीएन और SSP अभिषेक महाजन पूरी रात डटे रहे। रेस्क्यू किए गए बच्चों को तुरंत इलाज के लिए गोरखपुर स्थित एयरफोर्स अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने इस घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उक्त टंकी पिछले 26 वर्षों से बंद थी। जर्जर होने के चलते उसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया था। हालांकि, उस पर चढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई बोर्ड या सूचना नहीं दी गई थी।

आखिरी में पांचों बच्चों के बारे में जानिए

  • हादसे में जान गंवाने वाला बाले सिद्धार्थनगर के मोहाना थाना के जुगलीपुर का रहने वाला था। वह घर का इकलौता बेटा था। उसकी एक बड़ी बहन है। वह कक्षा 5 में पढ़ता था।
  • घायल गोलू नगर पालिका क्षेत्र के शास्त्री नगर का रहने वाला है। उसके पिता चंद्रेश मजदूरी करते हैं। परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन हैं।
  • घायल सनी नगर पालिका क्षेत्र के काशीराम आवास में बहन सुनीता के घर दो दिन पहले आया था। वह मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के उरवलिया गांव का रहने वाला है। वह दो भाइयों में सबसे छोटा है।
  • टंकी पर फंसने वाला कल्लू उर्फ साहबान नगर पालिका क्षेत्र के काशीराम आवास का निवासी है। परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं। उसने 4 साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी।
  • टंकी पर फंसने वाला पवन भी काशीराम आवास कॉलोनी में रहता है। परिवार में तीन भाई और एक बहन हैं। पवन भी पढ़ाई छोड़ चुका है।

प्रशासन ने अभिभावकों और युवाओं से अपील की है कि सोशल मीडिया रील या मनोरंजन के लिए जर्जर इमारतों और खतरनाक स्थानों पर न जाएँ। यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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