संस्कृति और समरसता: पाटन में भरा भैरू बाबा का विशाल मेला, ढांचा दंगल और कुश्ती में उमड़ा जनसैलाब
राजगढ़ (अलवर) अनिल गुप्ता
पाटन क्षेत्र के पाटन स्थित ठेकड़ा में सोमवार को लोक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। भैरू बाबा के स्थान पर आयोजित विशाल मेले में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया। भक्ति का आलम यह था कि श्रद्धालु मीलों दूर से कनक दंडवत लगाते हुए बाबा के दरबार पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना कर खुशहाली की मन्नतें मांगी।
दंगल और लोक संस्कृति का संगम
दोपहर बाद मेले का रंग परवान पर चढ़ा, जहां ढांचा दंगल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल की थाप पर लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मेले में समां बांध दिया। कुश्ती दंगल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा का मेला कमेटी और ग्रामीणों ने साफा पहनाकर और मालाओं से भव्य स्वागत किया।
"मेले मिटाते हैं जात-पात का भेद": मंत्री संजय शर्मा
जनसमूह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि मेले हमारी समृद्ध संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "मेला वह स्थान है जहां अमीर-गरीब और जाति-पाति का भेद मिट जाता है। हमारे बुजुर्गों ने सामाजिक समरसता की जो परंपरा हमें सौंपी है, उसे संजोए रखना और जातिवाद से ऊपर उठकर विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ना ही सच्ची सेवा है।"
सड़कों की मांग पर मंत्री का 'मजाकिया' जवाब
मेले के दौरान ग्रामीणों ने वन मंत्री के समक्ष गूगडोद चौराहे से पाटन, खरखड़ी चावण्ड सिंह से सैनी धर्मशाला और मनसा माता मंदिर से मानपुरा तक सड़क निर्माण की पुरजोर मांग रखी। वन विभाग की अड़चनों का जिक्र होने पर मंत्री संजय शर्मा ने मजाकिया लहजे में (चुटकी लेते हुए) कहा— "मैं तो वन मंत्री हूं, आपको भालू चाहिए तो भेज दूंगा, पैंथर या टाइगर चाहिए तो वो भी भेज दूंगा, सांप-बिच्छू और नेवला भी हाजिर है।" मंत्री के इस चुटीले अंदाज पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। हालांकि, बाद में उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए आश्वस्त किया कि वन क्षेत्र में आने वाली सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी (PWD) के अधिकारियों से आवेदन करवाकर प्राथमिकता से एनओसी (NOC) दिलाई जाएगी ताकि विकास कार्य न रुकें।
ग्रामीणों में उत्साह
मेले के अंत तक बाबा के दर्शनों के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में मेला कमेटी और स्थानीय प्रशासन का विशेष सहयोग रहा। यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी केंद्र बना।