भीषण गर्मी में वरदान साबित हो रही जौ की राबड़ी: लू से बचाव और सेहत का संगम
खैरथल (हीरालाल भूरानी) जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर है। पारा 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस तपती धूप और लू से राहत पाने के लिए खैरथल क्षेत्र के नागरिक अब अपने पारंपरिक खान-पान की ओर रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से जौ (घाट) से बनी राबड़ी गर्मी के इस मौसम में लोगों के लिए संजीवनी बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों का यह पारंपरिक पेय अब शहरी इलाकों में भी बेहद लोकप्रिय हो गया है। सुबह 7 बजे से ही शहर के प्रमुख चौराहों जैसे शनि मंदिर, अम्बेडकर चौराहा और हेमूकालानी चौक पर राबड़ी के स्टालों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बुजुर्गों के अनुसार, राबड़ी न केवल शरीर को ठंडक देती है, बल्कि यह एक प्राकृतिक टॉनिक के रूप में भी कार्य करती है। जिसमे -
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लू से सुरक्षा: राबड़ी के साथ कच्चे प्याज का सेवन करने से लू लगने का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
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ऊर्जा का स्रोत: चाय के विकल्प के रूप में राबड़ी का सेवन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है और बार-बार भूख नहीं लगने देता।
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पाचन में सुधार: जौ और छाछ का मिश्रण पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी और शीतल है।
क्षेत्र की महिलाएं आज भी रात के समय धीमी आंच पर जौ के दलिए को छाछ के साथ पकाकर राबड़ी तैयार करती हैं, जिसे सुबह दही और ठंडी छाछ के साथ परोसा जाता है। यह सदियों पुरानी परंपरा न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखे हुए है, बल्कि भीषण गर्मी में स्वास्थ्य सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है।


