अयोध्या धर्म नगरी में गूंजे प्रभु आदिनाथ के जयकारे, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया 'तप कल्याणक'
लक्ष्मणगढ़ (कमलेश जैन) कस्बे के जालूकी रोड स्थित 'अयोध्या धर्म नगरी' विशेष पंडाल में चल रहे श्री 1008 मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का तप (दीक्षा) कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर समूचा क्षेत्र जैन भजनों और भगवान आदिनाथ के जयकारों से गुंजायमान रहा।
- वैराग्य के दृश्य देख भावुक हुए श्रद्धालु, भव्य बारात ने मोहा मन
तप कल्याणक की क्रियाओं से पूर्व सुबह कस्बे के मुख्य मार्गों से भगवान आदिनाथ की भव्य बारात और शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालु नाचते-गाते और प्रभु की भक्ति में लीन नजर आए। इसके बाद दोपहर में पंडाल के रंगमंच पर भव्य 'तप कल्याणक' नाटक का मंचन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
- नीलांजना के नृत्य से उपजा वैराग्य: पंडित अरविंद शास्त्री
इस अवसर पर जैन विद्वान पंडित अरविंद शास्त्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए भगवान आदिनाथ के जीवन और वैराग्य के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, "एक बार देवराज इंद्र की सभा में अप्सरा नीलांजना का नृत्य चल रहा था। नृत्य के मध्य ही अचानक आयु पूर्ण होने से उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने भगवान आदिनाथ को संसार की क्षणभंगुरता और अनित्यता का बोध करा दिया। इसके बाद उन्होंने राजपाट और समस्त सांसारिक मोह-माया का त्याग कर वैराग्य पथ चुन लिया।"
पंडित शास्त्री ने बताया कि चैत्र कृष्ण नवमी के दिन देवों और मनुष्यों ने मिलकर प्रभु का दीक्षा संस्कार संपन्न कराया, जिसके बाद भगवान ने एक हजार वर्षों तक मौन रहकर घोर तपस्या की।
- इक्षु रस से हुआ था प्रथम पारणा
कथा के क्रम में बताया गया कि दीक्षा के बाद एक वर्ष तक भगवान आदिनाथ को आहार (भोजन) की प्राप्ति नहीं हुई, क्योंकि उस काल में किसी को मुनिराज को आहार देने की विधि ज्ञात नहीं थी। अंततः, एक वर्ष बाद अक्षय तृतीया के दिन हस्तिनापुर के राजा श्रेयांश ने उन्हें गन्ने के रस (इक्षु रस) का प्रथम आहार कराया, जिसे जैन इतिहास में ऐतिहासिक पारणा माना जाता है।
- आज मनेगा ज्ञान कल्याणक, रात्रि को सजेगी कवियों की महफिल
महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पंचकल्याणक के चौथे दिन, 25 जून गुरुवार को 'ज्ञान कल्याणक महोत्सव' धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति के दृश्य जीवंत किए जाएंगे। इसके साथ ही, महोत्सव के आनंद को दोगुना करने के लिए रात्रि 8:00 बजे से एक भव्य विशेष कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के ख्याति प्राप्त कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से इस पुण्य लाभ को लेने की अपील की है।


