'जिन्हें मृत मान चुका था परिवार, भरतपुर के अपना घर आश्रम ने लौटा दीं उनकी सांसें...'12 और 20 साल बाद बिछड़े अपनों से मिले विक्रम व राजू
भरतपुर (अवधेश अवस्थी)। 'मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है'— इस मूल मंत्र को सार्थक करते हुए भरतपुर स्थित 'अपना घर आश्रम' ने एक बार फिर ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने कई परिवारों की आंसुओं से भरी जिंदगी में खुशियों के चिराग रोशन कर दिए हैं। जिन परिजनों को ढूंढते-ढूंढते थककर अपनों ने दिल पर पत्थर रख लिया था और उन्हें मृत मान चुका था, वे ही दो इंसान सालों बाद अपने-अपने परिवारों के सामने जिंदा खड़े थे। 'अपना घर आश्रम' में जब वर्षों बाद बिछड़े अपनों का मिलन हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं।
12 साल बाद सुहाग को जिंदा देख फफक पड़ी पत्नी निर्मला पहली मर्मस्पर्शी दास्तान उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर निवासी विक्रम की है। वर्ष 2013 में मजदूरी करने दिल्ली गए विक्रम मानसिक अस्वस्थता के कारण परिजनों से बिछड़ गए थे। पीछे उनकी पत्नी निर्मला और दो मासूम बच्चे बेसहारा रह गए। पत्नी ने मजदूरी कर बच्चों को पाला और मान लिया कि उसका सुहाग अब इस दुनिया में नहीं है। वर्ष 2018 में गंभीर बीमारी, कुपोषण और टीबी से जूझ रहे विक्रम को दिल्ली से रेस्क्यू कर भरतपुर के 'अपना घर आश्रम' लाया गया। आश्रम में निरंतर चले लंबे इलाज और सेवा-जतन के बाद जब विक्रम की याददाश्त वापस लौटी, तो पूरे 12 साल बाद वे अपनी पत्नी और बच्चों से मिले।
20 साल बाद भाई से मिला राजू; पहली नजर में पहचान भी नहीं पाए परिजन ऐसी ही एक और भावुक कर देने वाली कहानी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी राजू की है। राजू वर्ष 2006 में सूरत काम करने निकले थे और मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण लापता हो गए थे। परिजनों ने हर जगह खोजबीन की, लेकिन सफलता न मिलने पर उनके जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी। वर्ष 2019 में सूरत से रेस्क्यू कर उन्हें आश्रम लाया गया।
आश्रम की देखरेख और सही इलाज से 20 साल बाद राजू का मानसिक स्वास्थ्य सुधरा। जब उनके भाई उन्हें लेने आश्रम पहुंचे, तो दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद वे राजू को पहली नजर में पहचान भी नहीं पाए। हालांकि, बातचीत के बाद जब पहचान की पुष्टि हुई, तो दो दशकों का लंबा इंतजार आंसुओं के साथ खत्म हुआ और पूरा परिवार एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़ा।

