राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत आयुर्विज्ञान की सिंधी शब्दावली निर्माण हेतु विशेषज्ञ सलाहकार समिति की द्वितीय बैठक का सफल समापन
खैरथल (हीरालाल भूरानी) भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान को सुदृढ़ बनाने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के उद्देश्यों को मूर्त रूप देने की दिशा में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT) द्वारा आयोजित "बृहत पारिभाषिक शब्द संग्रह : आयुर्विज्ञान (अंग्रेजी–हिंदी–सिंधी)" निर्माण हेतु विशेषज्ञ सलाहकार समिति (EAC-2) की पाँच दिवसीय द्वितीय बैठक का आज 24 जुलाई, 2026 को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अजमेर में सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह बैठक 20 से 24 जुलाई, 2026 तक आयोजित की गई, जिसमें देश के प्रतिष्ठित आयुर्विज्ञान विशेषज्ञों, सिंधी भाषा विशेषज्ञों, संस्कृत विशेषज्ञों तथा सिंधी (देवनागरी लिपि) डेटा विशेषज्ञ ने सक्रिय सहभागिता करते हुए चिकित्सा शब्दावली के मानकीकरण का महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किया।
पाँच दिवसीय बैठक के दौरान विशेषज्ञ सलाहकार समिति ने गहन विषयगत एवं भाषायी विचार-विमर्श के उपरांत लगभग 6,000 आयुर्विज्ञान संबंधी पारिभाषिक शब्दों के मानकीकृत सिंधी पर्यायों का निर्माण किया। समापन सत्र की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अजमेर के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. अनिल सामरिया ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. चन्द्र प्रकाश पोखरना, प्राचार्य, राजकीय कन्या महाविद्यालय, किशनगढ़ उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अनिल सामरिया ने पाँच दिवसीय कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विशेषज्ञों द्वारा अत्यंत गंभीरता, समर्पण एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ किया गया यह कार्य भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है तथा सिंधी भाषा में चिकित्सा जैसे विशिष्ट विषय में मानकीकृत पारिभाषिक शब्दावली का निर्माण इस दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. चन्द्र प्रकाश पोखरना, प्राचार्य, राजकीय कन्या महाविद्यालय, किशनगढ़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय भाषाओं में ज्ञान-सृजन एवं ज्ञान-प्रसार की सशक्त आधारशिला है। चिकित्सा जैसे विशिष्ट विषय की मानकीकृत सिंधी शब्दावली का निर्माण भारतीय भाषाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक दूरदर्शी एवं राष्ट्रीय महत्व की पहल है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली विद्यार्थियों, शिक्षकों, चिकित्सकों, शोधार्थियों तथा सामान्य नागरिकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी तथा चिकित्सा ज्ञान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली विद्यार्थियों, चिकित्सकों, शोधार्थियों तथा आमजन के मध्य चिकित्सा संबंधी ज्ञान के प्रभावी संप्रेषण का सशक्त माध्यम बनेगी। इस प्रकार की शब्दावलियाँ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सा साहित्य, अनुवाद तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा प्रदान करेंगी और भारतीय भाषाओं में ज्ञान-सृजन एवं ज्ञान-विस्तार को गति देंगी।
वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर से आयुर्विज्ञान सिंधी शब्दावली योजना के प्रभारी अधिकारी एवं सहायक निदेशक जय सिंह रावत ने पाँच दिवसीय बैठक की कार्य-प्रगति प्रस्तुत करते हुए बताया कि विशेषज्ञों द्वारा प्रत्येक चिकित्सा शब्द का विषयगत, भाषिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से गहन परीक्षण कर सिंधी पर्यायों का स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शब्दों का अनुवाद करना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान की एक मानकीकृत, प्रामाणिक एवं उपयोगी आधार-रचना तैयार करना है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आयोग भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा व्यावसायिक शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण पारिभाषिक शब्दावलियों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सिंधी शब्दावली चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा साहित्य, अनुसंधान, अनुवाद, प्रशासनिक कार्यों तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता के सिंधी भाषी क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
बैठक समन्वयक एवं अतिरिक्त प्राचार्य तथा वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. दीपा थदानी ने पाँच दिवसीय बैठक की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि सभी चिकित्सा एवं भाषा विशेषज्ञों के सक्रिय सहयोग से निर्धारित कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिंधी भाषा को वैज्ञानिक एवं तकनीकी अभिव्यक्ति से समृद्ध करने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी एवं मातृभाषा आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए जून 2027 तक इस राष्ट्रीय परियोजना को पूर्ण करने के लिए निरंतर सहयोग का आह्वान किया।
पाँच दिवसीय बैठक के दौरान विशेषज्ञों द्वारा अनुमोदित सिंधी पर्याय वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की अधिकृत शब्दावली का हिस्सा होंगे तथा आगामी प्रकाशन "बृहत पारिभाषिक शब्द संग्रह : आयुर्विज्ञान (अंग्रेजी–हिंदी–सिंधी)" में सम्मिलित किए जाएंगे। यह शब्दावली चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सा साहित्य, अनुवाद, चिकित्सा प्रशासन तथा जनस्वास्थ्य संचार के क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
आयोग द्वारा आमंत्रित एवं अनुमोदित विशेषज्ञ सलाहकार समिति में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से 10 सिंधी भाषी चिकित्सा विशेषज्ञ, 6 सिंधी भाषा विशेषज्ञ, 1 संस्कृत विशेषज्ञ तथा 1 सिंधी (देवनागरी लिपि) डेटा विशेषज्ञ ने सहभागिता की। चिकित्सा विशेषज्ञों में डॉ. दीपा थदानी, डॉ. कमलेश कुमार तनवानी, डॉ. ज्योत्सना चांदवानी, डॉ. लाल थदानी, डॉ. महेंद्र खन्ना, डॉ. गुरुदास खिलनानी, डॉ. धर्मेन्द्र बी. नागपाल, डॉ. महेश मेहता, डॉ. बलराम बचानी तथा डॉ. गोपाल कृष्ण बुलचंदानी शामिल रहे।
भाषा विशेषज्ञों के रूप में डॉ. चंद्र प्रकाश ददलानी, डॉ. हासो ददलानी, डॉ. कमला गोकलानी, मनोज कुमार, डॉ. परमेश्वरी पमनानी तथा संस्कृत विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र थदानी ने सहभागिता करते हुए शब्दावली निर्माण में अपने बहुमूल्य सुझाव प्रदान किए। इसके अतिरिक्त सिंधी (देवनागरी लिपि) डेटा विशेषज्ञ के रूप में सुरेश चंदानी भी कार्यशाला से जुड़े रहे।
समापन सत्र का संचालन डॉ. लाल थदानी, पूर्व अध्यक्ष ,राजस्थान सिंधी अकादमी सेवानिवृत्त और रिटायर्ड डिप्टी सीएमएचओ (Dy. CMHO), अजमेर राज सरकार ने किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कमलेश कुमार तनवानी, अतिरिक्त प्राचार्य, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अजमेर ने सभी विशिष्ट अतिथियों, चिकित्सा विशेषज्ञों, भाषा विशेषज्ञों, आयोग के प्रतिनिधियों तथा प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों से तैयार यह शब्दावली भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान तथा ज्ञान-विज्ञान के संवर्धन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों की पूर्ति में प्रभावी योगदान देगी।

