आरक्षण के दांव से बिगड़ा कई सूरमाओं का गणित: विधायक सुखवंत सिंह का कड़ा संदेश—गाड़ी में घूमने वालों को नहीं, केवल 'जिताऊ' को मिलेगा टिकट
अलवर कलेक्ट्रेट में सोमवार को आरक्षण प्रक्रिया ने गोविंदगढ़-रामबास नगरपालिका के सिर्फ 25 वार्डों का आरक्षण ही तय नहीं किया, बल्कि भाजपा-कांग्रेस के बड़े दावेदारों का राजनीतिक गणित भी बदल दिया। किसी का वार्ड महिला आरक्षित हो गया तो किसी का वार्ड सामान्य रहने से टिकट और चेयरमेन की दौड़ में संभावना मजबूत हुई है।
गोविंदगढ़-रामबास नगरपालिका के 25 वार्डों में 3 एससी, 6 एसटी , 5 ओबीसी समेत 09 वार्ड आरक्षित हुए हैं, जबकि 16 वार्ड सामान्य श्रेणी में हैं। महिलाओं के लिए कुल 08 वार्ड आरक्षित हैं। अब अगली लड़ाई टिकट की होगी। दोनों प्रमुख दल टिकट देते समय पार्षद का चेहरा ही नहीं आगे चेयरमेन पद की क्षमता, संगठन का समर्थन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी देखे जाएंगे।
[पार्टियों की रणनीति: केवल 'जिताऊ' पर दांव]
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रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह की सख्त चेतावनी:
भाजपा प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया पर रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह ने साफ संदेश दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया, "चाहे कोई मेरे साथ 24 घंटे गाड़ी में ही क्यों न घूमता हो, अगर वह जीतने की क्षमता नहीं रखता तो उसके टिकट की सिफारिश नहीं की जाएगी। हमारा ध्यान केवल मजबूत, टिकाऊ और जिताऊ उम्मीदवारों पर रहेगा।"
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कांग्रेस का 6 घंटे चला मैराथन मंथन:
दूसरी ओर, कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने 500 से अधिक नेताओं, विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों के साथ 6 घंटे तक मंथन किया। कांग्रेस भी युवाओं और जिताऊ चेहरों की तलाश में जुटी हुई है।
[निर्दलीय ठोकेंगे ताल?]
चूंकि गोविंदगढ़-रामबास में पहली बार नगरपालिका बोर्ड और महिला चेयरमैन का चुनाव हो रहा है, इसलिए टिकट न मिलने की स्थिति में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। दोनों ही प्रमुख दलों के लिए पार्टी के भीतर असंतोष को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगा।

