डिजिटल इंडिया और स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाती तस्वीरें: गुरलां में बेजुबान खा रहे प्लास्टिक, कौन है इस बदहाली का जिम्मेदार?
गुरलां ग्राम पंचायत में स्वच्छता अभियानों के दावों की खुली पोल; आवारा पशु निगल रहे जहरीला प्लास्टिक, बीमारियों के मुहाने पर खड़े ग्रामीण
गुरलां (भीलवाड़ा) बद्रीलाल माली
ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के सरकारी दावों के बीच गुरलां ग्राम पंचायत से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र व राज्य सरकार के स्वच्छता अभियानों को ठेंगा दिखाती यह ग्राउंड रियलिटी स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सफाई के नाम पर कागजों में बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हर तरफ गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है।
बेजुबानों की जिंदगी से खिलवाड़: पेट में जमा हो रहा प्लास्टिक
सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशी भूख मिटाने के चक्कर में कचरा डिपो और रास्तों पर मुंह मारने को मजबूर हैं। कचरा निस्तारण का उचित प्रबंधन न होने के कारण आवारा पशु चारे की तलाश में भारी मात्रा में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, पॉलिथीन और जहरीला कचरा निगल रहे हैं। पेट में प्लास्टिक जमा होने से कई बेजुबान अकाल मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, जो प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है।
बदबू और संक्रामक बीमारियों का गढ़ बना गांव
रास्तों के किनारे और पेड़ों के नीचे महीनों से सड़ रहा कचरा न केवल गांव के सौंदर्य को बिगाड़ रहा है, बल्कि भयंकर बदबू का कारण भी बन चुका है। डंपिंग यार्ड का अभाव और नियमित कचरा उठाव न होने से पूरा क्षेत्र मच्छरों का गढ़ बन गया है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियां फैलने का भय सता रहा है।
नालियां चोक, रास्तों पर भरा कीचड़
गांव की सफाई व्यवस्था का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नालियां गंदगी से पूरी तरह ठसाठस भरी हुई हैं। चोक नालियों का बदबूदार पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनता का आक्रोश: "बजट आखिर कहां हो रहा खर्च?"
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था के लिए हर साल भारी बजट जारी होता है, लेकिन हफ्ते में एक दिन भी ठीक से सफाई नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। अब देखना यह होगा कि पंचायती राज विभाग इस बदहाली का संज्ञान लेकर कब तक कार्रवाई करता है।

