जरूरतमंद परिवारों को मिठाई बांटकर मनाई दीपावली, कवि गोष्ठी में रचनाओं से सामाजिक विसंगतियों पर किया प्रहार

Nov 5, 2026 - 18:31
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जरूरतमंद परिवारों को मिठाई बांटकर मनाई दीपावली, कवि गोष्ठी में रचनाओं से सामाजिक विसंगतियों पर किया प्रहार

डीग (नीरज जैन) श्री लोहागढ़ साहित्य एवं समाज सेवा समिति की ओर से दीपावली के पावन पर्व पर जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां साझा करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज सेवा समिति के जिला अध्यक्ष मोहन स्वरूप पाराशर की अध्यक्षता एवं नगर परिषद उपसभापति प्रदीप शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में 150 जरूरतमंद परिवारों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए मिठाई वितरित की गई। डॉ. वीरेंद्र सिंह, उमेश पाराशर, मोहन बंसी वाले, सुनील बंसल, जालम सिंह कोटा एवं सूरज बेनीवाल विशिष्ट अतिथि रहे।
मुख्य अतिथि नगर परिषद उपसभापति प्रदीप शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियों का उजाला भरने का अवसर भी है। साहित्य समाज को दिशा देता है और समाज सेवा संवेदनाओं को धरातल पर उतारती है। जरूरतमंद परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करना सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की सार्थक पहल है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित कवि गोष्ठी का शुभारंभ समिति के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रभान चंद्र ने सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद कवियों ने समसामयिक विषयों, सामाजिक बदलावों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं।
बाल कवि कुशाग्र ने सुनाया—
नेताओं से भरी भरी हैं सड़कें, भरा पड़ा बाजार है।
खत्म होने को आया अब जनता का इंतजार है।श्रुति कुसुमाकर ने अपनी रचना प्रस्तुत की—नया दौर आएगा, यह मोबाइल बचपन खाएगा।तेजस्व सिंह ने सुनाया—अंधों को दर्पण क्या देना,बहरों को भजन सुनाना क्या।जो रक्तपान करते उनको,
गंगा का नीर पिलाना क्या।
धर्मेश चाहर ने अपनी कविता में कहा—राजनीति के उल्का पिंडों की जय हो।पुलिस प्रशासन के डंडों की जय हो।जगत पाराशर ने सुनाया—जो कोशिश एक हल्की सी हृदय से पार हो जाए।
शिला चाहो तो इस्पाती पिघल के तार हो जाए।वैष्णवी कुसुमाकर ने सामाजिक रिश्तों में बदलाव को स्वर देते हुए प्रस्तुत किया बहन को ना भैया को ना मैया को,बस ससुराल को हुकम बजायो है।मंगतू राम शर्मा ने सुनाया—
कौन बताओ मोकूं कौन बतावै, सुत, पित, मात और दारा कोई तेरे काम ना आवे।
कवि चंद्रभान वर्मा चंद्र ने अपनी रचना प्रस्तुत की—अभिमन्यु को चक्रव्यूह से बाहर कौन निकलेगा।
कार्यक्रम में कैप्टन कल्लू सिंह, भगवान शरण गुप्ता, युवराज फौजदार, विष्णु कुमार, मुरारी लाल सैनी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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