जलझूलनी ग्यारस पर बाड़िया श्याम मंदिर में उमड़ा भक्ति का सैलाब:जलझूलनी एकादशी पर बाड़िया श्याम का ऐतिहासिक आयोजन
जलझूलनी एकादशी पर बाड़िया श्याम सेवा समिति के तत्वावधान में दिन में निकली भव्य शोभायात्रा; रात्रि में सुप्रसिद्ध गायिका त्रिशा सुथार ने भजनों से श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
कोशीथल , रामनिवास सेन
जलझूलनी एकादशी के पावन पर्व पर बाड़िया श्याम मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बाड़िया श्याम सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस वार्षिक धार्मिक महोत्सव के दौरान दिन में भव्य शोभायात्रा निकाली गई तथा रात्रि में विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया।
डीजे और ढोल की थाप पर निकली मनमोहक शोभायात्रा
दोपहर में मंदिर से भगवान श्री श्याम की मनोहारी झांकी सजाकर भव्य शोभायात्रा रवाना की गई। डीजे और ढोल की गूंज तथा 'बाड़िया श्याम' के गगनभेदी जयकारों के साथ शोभायात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु महिलाएं सिर पर कलश धारण किए और पुरुष हाथों में श्याम निशान (ध्वजा) थामे शामिल हुए। गांव में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया।
भजन संध्या में देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु
रात्रि में आयोजित भव्य भजन संध्या में सुप्रसिद्ध भजन गायिका त्रिशा सुथार ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उन्होंने "जलझूलनी आयो त्यौहार..." तथा बाड़िया श्याम के कई लोकप्रिय भजन गाए, जिन पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते नजर आए।
विशेष सजावट, महाआरती और महाप्रसादी
जलझूलनी ग्यारस के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रंगीन लाइटों व सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। इस पावन अवसर पर भगवान श्याम को विशेष रूप से झूला झुलाया गया और महाआरती उतारी गई। तत्पश्चात सैकड़ों भक्तों ने दर्शन लाभ लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
बाड़िया श्याम सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भक्तों के अपार सहयोग से कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों व स्थानीय युवाओं का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन महाप्रसादी वितरण के साथ हुआ।

