सुगंध दशमी पर्व , सुगंध से महके जिनालय
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
सुगंध दशमी वह पर्व है जहाँ जैन समाज दसलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पालन करते हुए, मंदिरों में धूप जलाकर भगवान के प्रति अपनी भक्ति और शुद्ध मन की भावना व्यक्त करता है।
दिगंबर जैन समाज में पयुर्षण महापर्व के अंतर्गत आने वाली भाद्रपद शुक्ल दशमी को सुगंध दशमी का पर्व मंगलवार को मनाया गया। इसे धूप दशमी, धूप खेवन पर्व भी कहा जाता है। यह व्रत पर्युषण पर्व के छठवें दिन भाद्रपद शुक्ल दशमी को किया गया।
कस्बे के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में इस पर्व के तहत जैन धर्मावलंबीओ ने जैन मंदिर में पहुंचकर धूप अर्पित की, जिससे वायुमंडल सुगंधित व स्वच्छ हो गया। 24 तीर्थंकरों को धूप अर्पित कर भगवान से प्रार्थना कि - हे भगवान! इस सुगंध दशमी के दिन, मैं आनंद की तलाश के रूप में अपने नाम में प्रार्थना करता हूं। मैं तीर्थंकरों द्वारा बतलाए मार्ग का पालन करने की प्रार्थना करता हूं, जो ज्ञान और मुक्ति का एहसास कराते हैं। मैं आपके नाम का ध्यान धरकर मोक्ष प्राप्ति की कामना करता हूं। जिनवाणी व पुराने शास्त्रों के सम्मुख धूप चढ़ाई गई तथा उत्तम तप धर्म की आराधना कर आत्म कल्याण की कामना की गई। कस्बे में सुगंध दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
व्रत धारी महिलाओं द्वारा सुगंध दशमी के दिन हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह इन पांच पापों के त्याग रूप व्रत को धारण करते हुए चारों प्रकार के आहार का त्याग, मंदिर में जाकर भगवान की पूजा, स्वाध्याय, धर्मचिंतन-श्रवण, सामयिक आदि में अपना समय व्यतीत किया।
कहा गया है....
पर्व सुगंध दशै दिन जिनवर पूजै अति हरषाई,
सुगंध देह तीर्थंकर पद की पावै शिव सुखदाई।।
हे भगवान सुगंध दशमी के दिन सभी तीर्थंकरों का पूजन कर मेरा मन हर्षित हो गया है। धूप के इस पवित्र वातावरण से स्वयं भगवान भी खुश होकर मानव को मोक्ष पद का रास्ता दिखलाते हैं। इसी भावना के साथ सभी जैन मंदिरों में सुगंध दशमी पर धूप खेई जाती है। जैन धर्मावलंबी अपनी-अपनी श्रद्धानुसार मंदिर में अपने शीश नवाकर सुंगध दशमी का पर्व मनाते हैं।