15 उत्कृष्ट लर्नर, स्वयंसेवी शिक्षक हुए सम्मानित: अपने अधिकारों को जानने के लिए जरूरी है साक्षरता -जिला कलक्टर

Sep 8, 2025 - 12:27
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15 उत्कृष्ट लर्नर, स्वयंसेवी शिक्षक हुए सम्मानित: अपने अधिकारों को जानने के लिए जरूरी है साक्षरता -जिला कलक्टर

भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) 8 सितम्बर। 59 वें विश्व साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अन्तर्गत जिला कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को जिला स्तरीय सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में 15 उत्कृष्ठ कार्य करने पर लर्नर एवं स्वयंसेवी शिक्षकों को सम्मानित भी  किया गया। 
समारोह में जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एआई की भूमिका निरंतर विकसित हो रही है। जैसे-जैसे विज्ञान आगे बढ़ रहा है, एआई तकनीकें और भी परिष्कृत होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक समुदाय के सभी हितधारकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीक-आधारित शिक्षा के उचित समावेश के साथ एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के साझा लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। इससे शिक्षार्थियों को अधिक लचीलेपन के साथ आवश्यक कौशल प्राप्त करने, समझने और जोड़ने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि साक्षरता की ताकत किसी भी घर, परिवार और समाज के साथ सम्पूर्ण देश को प्रगति की ओर ले जाती है, साक्षरता ना केवल लोगों को बेहतर जीवन देती है, बल्कि सामाजिक कुरूतियों को दूर करने का जरिया बनती है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेने, लाभान्वित होने के लिए साक्षर होना बहुत जरूरी है । उन्होंने कहा कि किसान के शिक्षित होने पर आधुनिक कृषि प्रणाली जानकारी प्राप्त कर अपनी समृद्धि बढ़ा सकते हैं। उन्होंने साक्षर होने और सामाजिक एवं मानव विकास के लिए अपने अधिकारों को जानने की जरूरत के बारे में कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षित होने पर व्यक्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा ने कहा कि साक्षरता केवल अक्षर पहचानना भर नहीं है, अपितु यह जीवन को नई दिशा देने वाली शक्ति है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें अधिकारों के प्रति सजग बनाती है, आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाती है और समाज को समानता, प्रगति और समृद्धि की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि हमारा भारत कभी विश्वगुरु था और आज भी यदि हमें पुनः वही गौरवशाली स्थान प्राप्त करना है तो हमें संपूर्ण साक्षरता की ओर बढ़ना होगा। जब गाँव-गाँव की महिलाएँ शिक्षित होंगी, जब हर बच्चा किताबों से जुड़ेगा और जब हर परिवार में शिक्षा की ज्योति जलेगी, तभी वास्तविक विकास संभव होगा। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपने आस-पास किसी भी व्यक्ति को निरक्षर नहीं रहने देंगे। हर घर साक्षर हर मन उज्ज्वल का संकल्प लेकर आगे बढ़ेंगे। डिजिटल युग में कम्प्यूटर और तकनीकी साक्षरता को भी उतना ही महत्व देंगे जितना पारंपरिक शिक्षा को देते हैं। 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं है, बल्कि बच्चों और युवाओं में कौशल, नवाचार और चरित्र निर्माण की भावना जगाना है। उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि इस नीति को धरातल पर सफल बनाएँ और भरतपुर जिला राजस्थान ही नहीं, पूरे भारत के लिए साक्षरता का आदर्श बने। समारोह का संचालन अनुपमा चीमा ने किया।
इस अवसर पर अतिरिक्त कलक्टर शहर राहुल सैनी, जिला साक्षरता अधिकारी हरगोविन्द, अशोक धाकरे, मॉन्टेसरी स्कूल की बालिकाऐं सहित शिक्षकगण मौजूद रहे। 

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