अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन; खुशी का स्रोत बाहर नहीं, स्वयं के भीतर है -ब्रह्माकुमारी बहन
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव ) कस्बे के घूमचक्कर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की शाखा पर विश्व प्रसन्नता दिवस के उपलक्ष में संगोष्ठी आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी सुनीता दीदी ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रसन्नता कोई पाने की वस्तु नहीं, बल्कि यह हमारे भीतर की अवस्था है। जब हम अपने विचारों को सकारात्मक बनाते हैं और आत्मा की शक्ति को पहचानते हैं, तभी सच्ची खुशी का अनुभव होता है।
सच्ची प्रसन्नता बाहरी वस्तुओं, परिस्थितियों या व्यक्तियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह आत्मा की स्वाभाविक स्थिति है। सर्वोदय कार्यकर्ता बद्री प्रसाद तंवर ने कहा जब मनुष्य ध्यान के माध्यम से परमपिता परमात्मा से जुड़ता है, तब उसके जीवन में शांति, संतोष और स्थायी खुशी का अनुभव होता है। उन्होंने कहा आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के बावजूद भी अंदर से अशांत और तनावग्रस्त है, क्योंकि उसने अपनी वास्तविक आंतरिक खुशी को भुला दिया है।
एडवोकेट मोतीलाल सैनी ने सभी को प्रेरित किया कि वे प्रतिदिन कुछ समय ध्यान, सकारात्मक चिंतन और सेवा कार्यों के लिए निकालें, जिससे जीवन में स्थायी आनंद और संतुलन बना रहे। रामवतार गुप्ता ने श्रेष्ठ कर्म को प्रसन्नता का आधार बताया वही सुल्तान सिंह ने कहा व्यर्थ प्रश्नों से पार रहकर ही प्रसन्नचित रह सकते हैं। वीरेंद्र कुमार सैनी, सरोज असवाल , हर्षिता मीणा , बबीता जांगिड़, आशा सैनी ने खुश रहने को एक कला ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना बताया जो आत्मिक जागरूकता एवं श्रेष्ठ चिंतन से ही संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं प्रसन्न रहकर दूसरों के जीवन में भी खुशी का संचार करेंगे। इस अवसर पर मोहनलाल सैनी, राजू सैनी, रतनलाल, अनुष्का सैनी, ग्यारसी देवी, शांति सैनी, भगवती सैनी, मंजू असवाल, गायत्री कुमारी आदि अनेक व्यक्तियों ने भाग लिया।