लक्ष्मणगढ़ में गणगौर का रंग चरम पर 16 सिंगार में सजी तिजनियों का अनोखा उत्साह
लक्ष्मणगढ ,(अलवर/कमलेश जैन) अखंड सुहाग की कामना के लिए महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख गणगौर पूजन पर्व कस्बे में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। होली के दूसरे दिन से शुरू हुआ यह पारंपरिक उत्सव 21 मार्च आज गणगौरी तीज के दिन उद्यापन के साथ संपन्न हुआ ।पूजन के समापन पर होने वाले उद्यापन को लेकर नवविवाहित तीजणियों में विशेष उत्साह देखा गया । गणगौर पर्व के तहत श्री सार्वजनिक पुस्तकालय की ओर सेआयोजित कार्यक्रमों ने सांस्कृतिक रंगत और परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
महिलाओं ने प्रतिदिन पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर गणगौर माता की विधिवत पूजा-अर्चना की। लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियां पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया ।इसी कड़ी में कस्बे की पुस्तकालय समिति पिछले वर्षों से इस आयोजन का लगातार संचालन कर रही है। और इस बार भी इसकी खास झलक देखने को मिल रही है। महिलाएं, युवतियां और बालिकाएं मंगला-गणगौर के पारंपरिक गीत गाते हुए सामूहिक महिला-संगीत में शामिल हो रही हैं।ईसर- गणगौर पूजन के दौरान विवाहित महिलाओं ने सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की, वहीं युवतियों ने सुयोग्य वर पाने की प्रार्थना की।
गणगौर व्रत का मुख्य उद्देश्य अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए पूरे मनोयोग से गणगौर की पूजा करती हैं। यह परंपरा स्त्री जीवन में आशा, विश्वास और समर्पण के भाव को और अधिक दृढ़ करती है।